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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: उम्मीद है मुकुल रॉय की अयोग्यता पर दो सप्ताह में फैसला लेंगे विधानसभा अध्यक्ष, जानिए पूरा मामला

Mon, 17 Jan 2022 08:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मामले की उस सुनवाई को सोमवार को स्थगित कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कानून के तहत राज्य की पूर्व स्वीकृति के बगैर ही चुनाव के बाद की हिंसा के मामलों की जांच आगे बढ़ा रहा है।
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मुकुल रॉय - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उम्मीद जताई कि भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में गए विधायक मुकुल राय को अयोग्य घोषित करने के बारे में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष दो सप्ताह में फैसला ले लेंगे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह तक के लिए टाल दी। 

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जस्टिस एल नागेश्वर राव ओर जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के सामने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई फरवरी के तीसरे सप्ताह में की जाए क्योंकि बेहद कसी हुई समयसीमा तय करना उचित नहीं होगा। लेकिन कोर्ट ने फरवरी के दूसरे सप्ताह तक सुनवाई टालते हुए कहा कि उम्मीद है तबतक इसपर फैसला ले लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इसे आदेश के रूप में नहीं कह रहा है।

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और विधानसभा के सचिव एवं रिटर्निंग ऑफिसर की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें विधानसभा अध्यक्ष को 7 अक्तूबर तक अयोग्यता पर फैसला लेने का निर्देश दिया गया था।
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सीबीआई जांच के खिलाफ मुकदमे पर सुनवाई स्थगित
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मामले की उस सुनवाई को सोमवार को स्थगित कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कानून के तहत राज्य की पूर्व स्वीकृति के बगैर ही चुनाव के बाद की हिंसा के मामलों की जांच आगे बढ़ा रहा है।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी.वी नागरत्न की पीठ ने कहा कि मामले में उत्तर और प्रत्युत्तर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। पीठ ने इसके साथ ही वाद में अगली सुनवाई फरवरी के तीसरे हफ्ते तक टाल दी। पीठ ने पक्षों को मामले में लिखित दलीलें दायर करने का भी निर्देश दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर इस वाद में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून 1946 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा है कि सीबीआई कानून के तहत अनिवार्य राज्य सरकार की स्वीकृति के बगैर ही जांच कर रही है और प्राथमिकी दर्ज कर रही है।

पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अधिकार क्षेत्र का मामला है और इस पर सुनवाई में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। केंद्र ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि पश्चिम बंगाल में सीबीआई द्वारा दर्ज चुनाव बाद हिंसा के मामलों से उसका कोई लेना-देना नहीं है और राज्य सरकार के इस वाद जिसमें उसे एक पक्ष बनाया गया है वह विचार योग्य नहीं है। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि सीबीआई संसद के विशेष अधिनियम के तहत स्थापित एक स्वायत्त निकाय होने के नाते वह एजेंसी है जो मामलों को दर्ज कर रही है और जांच कर रही है और इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है।

एनक्लैट के खिलाफ देवास मल्टीमीडिया की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनक्लैट) के एक आदेश के खिलाफ देवास मल्टीमीडिया की याचिका को खारिज कर दिया है। एनक्लैट की बेंगलुरु पीठ ने 25 मई 2021 को देवास मल्टीमीडिया को बंद करने और इसके लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया था। इस फैसले को एनक्लैट की मुख्य पीठ ने भी कायम रखा था। फैसले को देवास मल्टीमीडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रह्मयण्यम की पीठ ने देवास की याचिका को खारिज कर दिया है।

देवास मल्टीमीडिया इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के साथ स्पेक्ट्रम समझौते और बाद में इस समझौते में दलाली के आरोपों के कारण चर्चा में  था। 2011 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने इस समझौते को रद्द कर दिया था। अभी देवास के शेयरधारकों ने पूरी दुनिया के अलग-अलग देशों में भारत सरकार के खिलाफ क्षतिपूर्ति का केस दायर कर रखा है और कनाडा और फ्रांस में उन्हें जीत भी मिल चुकी है।
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