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सर्वे में खुलासा: तीसरी लहर ने पर्यटकों को पहुंचाया नुकसान, 71 फीसदी हवाई यात्रियों को नहीं मिला रिफंड

Mon, 17 Jan 2022 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि जनवरी-मार्च 2022 के दौरान फ्लाइट बुकिंग के कैंसिलेशन की प्रक्रिया ने कैसा प्रदर्शन किया। इसके जवाब में 29 फीसदी ने कहा कि ट्रैवल एजेंट और एयरलाइंस ने पूरा पैसा वापस किया। वहीं 14 फीसदी ने कहा कि उन्हें पूरी रकम का कुछ हिस्सा वापस मिला। वहीं 29 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें बेहद मामूली रकम वापस मिली...
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भारत में कोरोना के मामले - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने हवाई टिकट और होटल की बुकिंग रद्द करवा दी थी। लेकिन अब तक ऐसे यात्रियों को बुकिंग का पूरा पैसा वापस नहीं मिल पाया है। लोकल सर्कल्स एजेंसी के ऑनलाइन सर्वे से पता चला है कि केवल 29 फीसदी लोग ही रद्द उड़ानों पर पूरा रिफंड पा सके, जबकि केवल 34 फीसदी लोग ही होटल बुकिंग रद्द करने पर अपनी रकम वापस पा सके। यानी 71 फीसदी हवाई यात्री और 64 फीसदी होटल बुकिंग कराने वालों को पूरा रिफंड नहीं मिला।

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ये कैंसिलेशन कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के तेजी से फैलने की वजह से कराए गए थे। कोरोना की तीसरी लहर के चलते राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रात और वीकेंड कर्फ्यू लागू किए गए थे। जिसकी वजह से यात्रियों को ये कदम उठाने पड़े थे। लोकल सर्कल्स के सर्वे में ये नतीजा दिखा कि एक-तिहाई लोगों को ही पूरा रिफंड हासिल हो सका। सर्वे में देशभर के 332 जिलों से 20 हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं।

सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि जनवरी-मार्च 2022 के दौरान फ्लाइट बुकिंग के कैंसिलेशन की प्रक्रिया ने कैसा प्रदर्शन किया। इसके जवाब में 29 फीसदी ने कहा कि ट्रैवल एजेंट और एयरलाइंस ने पूरा पैसा वापस किया। वहीं 14 फीसदी ने कहा कि उन्हें पूरी रकम का कुछ हिस्सा वापस मिला। वहीं 29 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें बेहद मामूली रकम वापस मिली। 14 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें रकम वापस नहीं मिली, बल्कि एयरलाइंस ने तारीख आगे बढ़ाकर दोबारा टिकट बुक कर दिया। वहीं 14 फीसदी कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं रहे।
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होटल बुकिंग के मामले में पाया गया कि 34 फीसदी को कैंसिलेशन पर फुल रिफंड मिला। 13 फीसदी को आंशिक रकम वापस मिली, जबकि 13 फीसदी को बेहद मामूली रकम लौटाई गई। इसके अलावा 27 फीसदी लोगों ने कहा कि ट्रैवल एजेंट या होटल की तरफ से रिफंड नहीं मिला, और उनका पूरा पैसा डूब गया।

कोरोना की दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर में ढाई गुना ज्यादा लोगों को रिफंड मिला। हालांकि, बहुसंख्यक वर्ग ऐसा रहा जिसे पैसा वापस नहीं मिला। लोकल सर्कल्स के फाउंडर सचिन तपाड़िया ने कहा कि कैंसिलेशन चार्जेज के मामले में एकरूपता न होने से कंपनियों को मनमानी करने की छूट मिल जाती है।

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