IBC प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली 390 से अधिक याचिकाओं पर 'सुप्रीम' सुनवाई शुरू
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली करीब 391 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की गई। इनमें दावा किया गया है कि ये समानता के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष इन याचिकाओं पर दिन भर सुनवाई की गई।
इस दौरान मुख्य याचिकाकर्ताओं में से एक सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने पक्ष रखा। इन याचिकाओं पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने अलग-अलग तारीखों पर विभिन्न आधारों पर आईबीसी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किए थे। बाद में, सुरेंद्र बी जीवराजका द्वारा दायर मुख्य याचिका सहित सभी 391 याचिकाओं को कानूनी मुद्दों पर एक आधिकारिक घोषणा के लिए एक साथ जोड़ दिया गया था।
जजों की नियुक्ति में केंद्र के द्रष्टिकोण पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विभिन्न हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के नामों को मंजूरी देने में केंद्र सरकार के द्रष्टिकोण को लेकर नाराजगी जाहिर की। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पीठ को उम्मीद है कि ऐसी स्थिति नहीं आएगी जहां उसे या कॉलेजियम को कोई ऐसा निर्णय लेना पड़े जो सुखद न हो।
इस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि कई चीजों को फास्ट ट्रैक पर रखा गया है। इस पर जस्टिस कौल ने कहा कि अभी तक पांच नाम हैं जो लंबित हैं जिन्हें दूसरी बार भेजा गया है। इसके अलावा 14 नाम और लंबित हैं। इन 14 नामों में परेशानी भरा पहलू यह है कि आपने नंबर 3,4,5 को नियुक्त किया है लेकिन नंबर 1 व 2 को नियुक्त नहीं किया गया है। ऐसे में वे वरिष्ठता खो देते हैं, यह स्वीकार्य नहीं है। मैं कभी भी किसी को न्यायाधीश पद स्वीकार करने का सुझाव नहीं दे पाऊंगा जिसके पास वकालत की अच्छी प्रैक्टिस है, वह जज बनने में दिलचस्पी क्यों लेना चाहेगा।