सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऑनर किलिंग (सम्मान के लिए हत्या) के एक मामले में आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत दिए जाने पर कहा, आरोपी को मुकदमे के नतीजे का इंतजार करना चाहिए था। मामले में केरल के एक युवक ने राजस्थान की लड़की से शादी की थी और आरोप है कि लड़की के परिवारवालों ने 2017 में लड़के की हत्या करवा दी।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने मृतक अमित नायर के रिश्तेदार और आरोपी मुकेश चौधरी की जमानत पहले रद्द कर दी थी। पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मुकदमा अब भी लंबित होने के बावजूद आरोपी को जमानत दे दी गई।
पीठ ने कहा, यह कैसा आदेश है। इस मामले में इंतजार क्यों नहीं किया गया। मुकदमे से पहले जमानत पाने के लिए आपके मुवक्किल की बेचैनी सही नहीं है। हमने पहले जमानत रद्द कर दी थी। उसे मुकदमे के पूरा होने का इंतजार करना चाहिए था।
राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों, अमित नायर की विधवा ममता नायर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा, जमानत रद्द करने के लिए दायर याचिका पर आदेश बाद में सुनाया जाएगा।
इससे पहले सुनवाई शुरू होने पर जयसिंह ने कहा, यह ‘ऑनर किलिंग’ का मामला है, जिसमें परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाली महिला के पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोपी को जमानत मिल गई, जिसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। यह आपराधिक साजिश का मामला है।
यह था मामला
जयपुर निवासी ममता ने अगस्त 2015 में अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ मुकेश चौधरी के दोस्त अमित से शादी की थी। मई 2017 में महिला के माता-पिता जीवनराम चौधरी और भगवानी देवी ने जयपुर में अपने दामाद अमित नायर की हत्या की कथित तौर पर साजिश रची।
आरोप है कि महिला के माता-पिता एक परिचित के साथ उसके घर में घुसे, जिसने अमित को गोली मार दी और उसका दूसरा साथी बाहर कार में इंतजार कर रहा था। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने भी जयसिंह की दलील का समर्थन करते हुए कहा कि आरोपी मुकेश को हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द की जाए।