सार
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) को एक मामले में फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि एक सरकारी संस्था को सिर्फ अपने फायदे नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों का पालन करते हुए आदर्श नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार एक मामले में सुनवाई के दौरान गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जीयूवीएनएल एक सरकारी संस्था है, इसलिए उसे सिर्फ अपने फायदे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उसे सरकार की नीति का भी पालन करना चाहिए और ऐसा व्यवहार करना चाहिए जैसा एक आदर्श नागरिक करता है।
बता दें कि यह मामला चार कंपनियों से जुड़ा था, जिन्होंने अपनी पवन ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली बेचने के लिए उचित दाम (टैरिफ) तय करने की मांग की थी। इन कंपनियों ने गुजरात इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जीईआरसी) से शिकायत की थी। जीईआरसी और फिर अपीलीय बिजली ट्रिब्यूनल (एपीटीईएल) ने इन कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने जीयूवीएनएल की मांग को बताया गलत
हालांकि जीयूवीएनएल ने इन फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में जीयूवीएनएल का कहना था कि कंपनियों ने जो बिजली बेचने का समझौता किया था, उसमें तय दाम से अलग टैरिफ नहीं मांगा जा सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीयूवीएनएल की बात गलत है, क्योंकि कंपनियों ने एक टैक्स योजना का लाभ नहीं लिया था। इसलिए उन पर कम टैरिफ लागू नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने जीयूवीएनएल को बताया लालची
कोर्ट ने आगे जीयूवीएनएल के व्यवहार को 'शाइलॉक' जैसे लालची किरदार से तुलना करते हुए कहा कि यह तरीका एक सरकारी संस्था के लिए ठीक नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि जीयूवीएनएल को सिर्फ मुनाफा नहीं देखना चाहिए, बल्कि सरकार की नीतियों, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की नीति का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने 2023 में दिया गया एक पुराना आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि टैरिफ पर फैसला सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बिना नहीं हो सकता। ऐसे में ये अब साफ हो गया कि जीईआरसी इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।