सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर सरकार से सवाल किया कि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की कथित ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच (एफएसएल) रिपोर्ट अब तक अदालत में क्यों नहीं सौंपी गई। शीर्ष कोर्ट ने मई 2025 में इसके लिए आदेश दिया था। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा, 'फॉरेंसिक रिपोर्ट का क्या हुआ? वह तो आ जानी चाहिए थी। तीन महीने बीत चुके हैं। अब तक प्रयोगशाला ने तो रिपोर्ट भेज दी होगी। कम से कम ये तो बताइए कि रिपोर्ट आई या अब भी लंबित है।'
राज्य सरकार के वकील ने जब कहा कि एफएसएल रिपोर्ट अब तक नहीं आई है, तब बेंच ने कहा, एक वॉइस एनालिसिस रिपोर्ट में कितना समय लगता है? इसे यूं ही अनिश्चितकाल तक नहीं टाला जा सकता। इस टिप्पणी के बाद भी सोमवार को यह मामला दोबारा सुनवाई के लिए नहीं लाया जा सका।
क्या है पूरा मामला?
पांच मई 2025 को तत्कालीन चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने बीरेन सिंह की कथित ऑडियो क्लिप की जांच से जुड़ी रिपोर्ट देखी थी। केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी गई थी। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था, एफएसएल रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है, लेकिन जांच पूरी करने के लिए एक महीना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि अब मणिपुर में शांति है, इसलिए यह मामला हाईकोर्ट में भी सुना जा सकता है। बेंच ने यह मामला 21 जुलाई के सप्ताह में फिर से सुनवाई के लिए रखा था। लेकिन अभी तक नई रिपोर्ट कोर्ट में नहीं दी गई।
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याचिकाकर्ता ने क्या कहा
कुकी ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (केओएचयूआर) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए क्योंकि यह मामला सीधे पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ऑडियो क्लिप में बीरेन सिंह को मैतेई समूहों को हथियार लूटने की छूट देते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन क्लिप में बहुत गंभीर और परेशान करने वाली बातें हैं, जिनसे लगता है कि बीरेन सिंह ने हिंसा को भड़काया और दोषियों को संरक्षण दिया।
बीरेन सिंह पर क्या आरोप हैं
केओएचयूआर की याचिका के अनुसार, बीरेन सिंह ने मई 2023 में मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा के दौरान कुकी बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर हत्या, तोड़फोड़ और हिंसा को उकसाया और उसका नेतृत्व किया। कथित ऑडियो में उन्हें हिंसा में शामिल लोगों को सुरक्षा देते और हिंसा को बढ़ावा देते सुना गया।
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मणिपुर में क्या हुआ था
मई 2023 में मणिपुर में हिंसा शुरू हुई थी, जब 'आदिवासी एकजुटता मार्च' निकाला गया था। यह मार्च हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ था, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग पर विचार करने को कहा गया था। इस हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
फिलहाल क्या स्थिति है?
बीरेन सिंह ने नौ फरवरी 2025 को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उस सम राज्य भाजपा में अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन की मांगें तेज हो गई थीं। अब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है, और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जांच में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि वह एफएसएल रिपोर्ट को और देर तक लंबित नहीं रहने देगा और राज्य सरकार को जल्द से जल्द इसे दाखिल करना होगा।