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दिल्ली राशन योजना: केंद्र ने दी थी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से किया इनकार

Mon, 15 Nov 2021 09:28 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में राशन वितरण योजना को लेकर हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला अभी हाईकोर्ट के सामने विचाराधीन है ऐसे में अभी हमारा इस पर सुनवाई करने का कोई तुक नहीं बनता।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें दिल्ली में राशन योजना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने आदेश में आम आदमी पार्टी सरकार को निर्देश दिया था कि उचित मूल्य की दुकानों को खाद्यान्न या आटे की आपूर्ति को रोकना या कम न किया जाए।

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न्यायाधीश एलएन राव और बीआर गवई की पीठ ने सोमवार को कहा कि यह फैसला अंतरिम है और हाईकोर्ट के सामने 22 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। ऐसे में पीठ इस पर विचार नहीं करना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।

इसके साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि 22 नवंबर को इस मामले का निपटारा कर दें। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि इस मामले के व्यापक प्रभाव हैं और यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने जो अनुमति दी है वह कानून के तहत मान्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि यह अधिनियम लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित करने के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कोई राज्य सरकार केंद्रीय कानून के तहत निर्धारित वितरण के तरीके से अलग तरीका अपना सकती है। कानून के अनुसार उचित मूल्य की दुकानों को खाद्यान्न केंद्र आवंटित करता है और वह वितरित करते हैं।

मेहता की इस दलील पर पीठ ने कहा कि ये तर्क हाईकोर्ट के सामने भी अच्छी तरह से उठाए जा सकते हैं। पीठ ने कहा कि एक सप्ताह में कुछ नहीं बदल जाएगा और यही उचित रहेगा कि सभी पक्ष अपनी दलीलें हाईकोर्ट के सामने रखें। सुप्रीम कोर्ट इसी मामले पर दाखिल की घई दिल्ली सरकारी राशन डीलर संघ की एक याचिका भी खारिज कर दी।

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