सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के निलंबित आईजीपी जहूर हैदर जैदी की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। जैदी वर्ष 2017 की हिरासत में मौत के एक मामले में हिरासत में हैं। एसपी रैंक के एक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में पिछले साल उनकी जमानत रद्द कर दी गई थी।
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की अवकाशकालीन पीठ ने पाया कि सीबीआई के गवाह एसपी रैंक के एक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में पिछले साल उनकी जमानत रद्द कर दी गई थी। पीठ ने कहा कि जब याचिकाकर्ता जैदी इतने बड़े अधिकारी को प्रभावित कर सकते है, तो अन्य गवाहों को भी प्रभावित कर सकते हैं। जैदी के वकील ने कहा कि वह तीन वर्ष जेल में बिता चुके है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
मामले के मुताबिक, शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसकी जंगल से लाश मिली थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था, जिसकी कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को मौत हो गई थी। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस की प्रताड़ना से सूरज की मौत हुई थी। सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाया था। जैदी फिलहाल चंडीगढ़ जेल में बंद हैं।