इससे पहले लखनऊ की विशेष अदालत ने प्रजापति को इस मामले में डिफॉल्ट बेल देने से इनकार कर दिया था। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की कस्टडी में भेज दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की उस आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में डिफ़ॉल्ट बेल(तय समय के भीतर चार्जशीट दायर न होने पर जमानत) देने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस आवेदन का उपचार इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास है।
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इससे पहले लखनऊ की विशेष अदालत ने प्रजापति को इस मामले में डिफॉल्ट बेल देने से इनकार कर दिया था। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की कस्टडी में भेज दिया था। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पीएस नरसिंहा की पीठ ने डिफॉल्ट बेल की मांग वाली प्रजापति की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए उनके वकील विक्रम चौधरी से कहा कि उन्हें इसके लिए हाईकोर्ट जाना चाहिए।
चौधरी ने पीठ के समक्ष प्रजापति को ईडी की कस्टडी में देने के विशेष अदालत के निर्देश का भी विरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है। जिसके बाद पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि चूंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है इसलिए अगर हाईकोर्ट में डिफॉल्ट बेल के लिए याचिका दाखिल की जाती है तो उसका शीघ्र निपटारा किया जाना चाहिए।