वसूली का आरोप झेल रहे छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने की अनिच्छा जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारी को जेल में ही होना चाहिए। हालांकि बाद में पीठ ने सिंह को मामले में संरक्षण दे दिया।
चीफ जस्टिस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, जो पुलिस अधिकारी सरकार के साथ तालमेल बिठाते हैं और पैसा भी कमाते हैं, उन्हें सत्ता में बदलाव के बाद भुगतना ही पड़ता है। शीर्ष अदालत ने हालांकि सिंह के वकील से कहा कि उनके मुवक्किल हर मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं ले सकते। जब लोग सरकार के करीबी होने के कारण अवैध वसूली शुरू करते हैं तो चीजें गलत मोड़ लेती हैं। यह तब होता है, जब आप सरकार के करीबी होते हैं और ये काम करते हैं। कभी न कभी आपको भुगतना ही होगा।
सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने कहा कि वह ऐसी श्रेणी के अधिकारियों को अंतरिम संरक्षण देने का इच्छुक नहीं है। इससे पहले सिंह को दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट का संरक्षण मिल चुका है।
एडीजी रैंक के अधिकारी सिंह ने पहले भी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दायर आय से अधिक संपत्ति और देशद्रोह के मामले में सुरक्षा की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। पीठ ने कहा, जब सरकार के साथ आपके अच्छे संबंध होते हैं तो आप कमाई करते हो। बाद में आपको ब्याज के साथ वापस भुगतान करना पड़ता है। यह देश में नया चलन है।
जब सिंह के वकील ने कहा कि उनके जैसे अधिकारियों को सुरक्षा की जरूरत है तो पीठ ने कहा, नहीं, उन्हें जेल जाना होगा। हालांकि बाद में अंतरिम संरक्षण देने के साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।