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Supreme Court: सिंगापुर सुप्रीम कोर्ट की जज जूडिथ प्रकाश संविधान पीठ में हुईं शामिल, इस मामले पर करेंगी सुनवाई

Wed, 06 Mar 2024 02:09 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बुधवार को जस्टिस जूडिथ प्रकाश का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ महीने पहले सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन हमारे साथ थे और जस्टिस जूडिथ प्रकाश हमारे बीच हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सिंगापुर सुप्रीम कोर्ट की जज जूडिथ प्रकाश को बुधवार को भारतीय सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल किया गया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में नौ जजों की ये पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है कि क्या केंद्र सरकार द्वारा खनिज-खनन पर ली जाने वाली रॉयल्टी को टैक्स माना जा सकता है या नहीं। 
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जस्टिस जूडिथ प्रकाश संविधान पीठ में बतौर मेहमान जज शामिल की गई हैं। जूडिथ प्रकाश दिल्ली आर्बिट्रेशन वीकेंड में शामिल होने के लिए भारत आई हुई हैं। बुधवार को जस्टिस जूडिथ प्रकाश का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ महीने पहले सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन हमारे साथ थे और जस्टिस जूडिथ प्रकाश हमारे बीच हैं। वे दिल्ली आर्बिट्रेशन वीक में शामिल होने आई हैं, जहां वे संबोधन देंगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और खनिज-खनन पर रॉयल्टी मामले में दलीलें रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने भी जस्टिस जूडिथ प्रकाश का स्वागत किया। दिल्ली आर्बिट्रेशन वीक का दूसरा संस्करण दिल्ली में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर 6-10 मार्च के बीच आयोजित होगा। 
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'महिलाओं को बड़े पदों पर बढ़ावा देना अहम कदम'
महिलाओं से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश हिमा कोहली ने कहा कि महिलाओं को बड़े पदों पर बढ़ावा देना और सम्मेलनों में मुख्य वक्ताओं के रूप में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना, पैनलों में उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना अचेतन पूर्वाग्रह पर काबू पाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बढ़ावा देने से वास्तविक मूल्य को पहचान मिलेगी।

न्यायाधीश हिमा कोहली ने कहा कि युवा महिला वकीलों को इंटर्नशिप देने, कानूनी विभागों और सरकारी क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के दरवाजे खोलने से कानून फर्मों, न्यायाधीशों और न्यायाधिकरणों और आयोगों के सदस्यों के रूप में उनके भविष्य में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। न्यायाधीश कोहली ने कहा कि विवाद समाधान के क्षेत्र में समावेशिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए मध्यस्थों के बीच लिंग आधारित विविधता अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस तरह का समावेशी दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया समाजों की समृद्ध छवि को प्रतिबिंबित करेगी, जिससे इसके परिणामों की वैधता और निष्पक्षता बढ़ेगी।

आंध्र प्रदेश के कानून में घी है पशुधन उत्पाद
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कानून के तहत ‘घी’ एक पशुधन उत्पाद है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की 1994 की उस अधिसूचना को बरकरार रखा है, जिसमें बाजार समितियों को इसकी बिक्री और खरीद पर शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। घी की बिक्री और खरीद पर बाजार शुल्क लगाने से जुड़े प्रश्न के अलावा, शीर्ष अदालत को यह तय करना था कि क्या यह आंध्र प्रदेश (कृषि उपज और पशुधन) बाजार अधिनियम के प्रावधानों के तहत पशुधन का उत्पाद है।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस एसवीएन भाटी की पीठ ने कहा, यह तर्क कि घी पशुधन का उत्पाद नहीं है, निराधार और किसी भी तर्क से रहित है। इसके विपरीत यह तर्क कि घी वास्तव में पशुधन का एक उत्पाद है, तार्किक रूप से सही है। अधिनियम की धारा 2(5) के तहत पशुधन को परिभाषित किया गया है, जहां गाय और भैंस पशुधन हैं। निर्विवाद रूप से घी पशुधन के उत्पाद दूध से निकला उत्पाद है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि घी पशुधन का उत्पाद नहीं है क्योंकि गाय और भैंस इसका सीधे उत्पादन नहीं करती हैं। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ संगम मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की याचिका को खारिज कर दिया। इससे राज्य में बाजार समितियों के माध्यम से इसकी बिक्री और खरीद पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो गया। पीठ के लिए फैसला लिखते हुए जस्टिस धूलिया ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि पशुधन उत्पाद के रूप में घी को शामिल करने को सिर्फ इसलिए गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह किसी अन्य डेयरी उत्पाद से प्राप्त हुआ है।
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संविधान संसद को खनिज विकास का पूरा अधिकार नहीं देता: शीर्ष अदालत
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि संविधान संसद को खनिज विकास का पूरा अधिकार नहीं देता है और राज्यों के पास खानों और खनिजों के नियमन व विकास करने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की इस दलील पर सुनवाई कर रही थी कि खनिजों पर कर (टैक्स) लगाने की संसद की शक्ति से राज्यों के अधिकार खत्म हो सकते हैं।
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