23 साल पुराने मामले में सुरजेवाला को गैर जमानती वारंट से संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने 23 साल पुराने आपराधिक मामले में वाराणसी की सांसद/विधायक अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट से कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को संरक्षण प्रदान कर दिया। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने गैर-जमानती वारंट रद्द कराने के लिए सुरजेवाला को पांच सप्ताह के भीतर विशेष न्यायाधीश (सांसद/विधायक) वाराणसी की अदालत से संपर्क करने को कहा। यह मामला वर्ष 2000 का है। सुरजेवाला उस समय भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उन पर वाराणसी में संवासिनी मामले में कांग्रेस नेताओं को कथित रूप से झूठा फंसाए जाने के विरोध में हंगामा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
चंद्रबाबू नायडू की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने फाइबरनेट मामले में अग्रिम जमानत की मांग करने वाली टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर सुनवाई 30 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मामले को यह कहते हुए टाल दिया कि कौशल विकास घोटाला मामले में याचिका को रद्द करने की मांग वाली नायडू की एक अन्य याचिका पर फैसला दिवाली की छुट्टियों के बाद आ सकता है। पीठ ने कहा कि उसी याचिकाकर्ता की एक और याचिका है, जिसमें कुछ ओवरलैपिंग मुद्दे हैं, जिसमें इस पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले को 30 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की मूल गवाही दाखिल करने में देरी की निंदा की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आजीवन कारावास या मृत्युदंड से जुड़ी आपराधिक अपीलों में मुख्य गवाहों की गवाही की मूल प्रति देरी से दाखिल करने की प्रथा की निंदा की। साथ ही शीर्ष अदालत के नियमों में बदलाव का सुझाव दिया ताकि इस तरह की सॉफ्ट कॉपी दाखिल की जा सके।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ एक मामले में दो व्यक्तियों की आपराधिक अपील पर फैसला कर रही थी। शीर्ष अदालत ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोपी सजीव और रॉय को आजीवन कारावास की सजा देने के ट्रायल कोर्ट और केरल उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।