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SC Updates: दिल्ली HC के अवमानना मामले पर अदालत ने वकील को लगाई फटकार, कहा- जजों से बिना शर्त मांगें माफी

Tue, 16 Jan 2024 04:36 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीशों पर अनुचित टिप्पणी के चलते एक वकील को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट के कई न्यायाधीशों के खिलाफ अनुचित, निंदनीय, आधारहीन आरोप लगाने के लिए एक वकील को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया गया था, जिसमें छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने वकील को आदेश दिए कि उन्हें निंदनीय आरोपों के लिए न्यायाधीशों से बिना शर्त माफी मांगनी होगी। पीठ ने कहा कि यह माफी नहीं है, वह कैसे कह सकते हैं कि यह अनजाने में हुआ। शीर्ष अदालत ने उन्हें माफी मांगने का एक और मौका दिया और मामले की सुनवाई 19 जनवरी को तय की। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने नौ जनवरी को वकील को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था और उन पर दो हजार का जुर्माना लगाने के साथ ही छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। 
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हेलीकॉप्टर घोटाले मामले में राजीव सक्सेना के खिलाफ सीबीआई की याचिका खारिज

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद घोटाले मामले में सरकारी गवाह राजीव सक्सेना को जमानत न देने वाली सीबीआई की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट से मना कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूडड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय उनके स्वास्थ्य स्थिति पर पूरा ध्यान दिया था, वे जांच में सहयोग कर रहे थे। अदालत ने जमानत रद्द करने की मांग वाली सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि आप इस मामले पर निचले कोर्ट का ऱुख कर सकते हैं। 

सीबीआई की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सक्सेना जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और वे पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दे रहे हैं। गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने 16 फरवरी, 2021 को मेडिकल कारणों पर राजीव सक्सेना को जमानत दे दी थी। 
 
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DNA  प्रोफाइल के डेटाबेस की मांग वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारत ने 2018 में वादा किया था कि अज्ञात और लावारिस शवों के रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए एक विधेयक संसद में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल जुलाई में लोकसभा से डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019 वापस ले लिया, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान के लिए डीएनए प्रौद्योगिकी के उपयोग को विनियमित करना था। पीठ ने सुनवाई के बाद केंद्र से इस मामले पर जवाब मांगा है। 
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