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सुप्रीम कोर्ट: ज्ञानवापी मामले पर सुनवाई के लिए अदालत सहमत; अयोग्यता मसले में उद्धव की अर्जी सात को सुनी जाएगी

Fri, 01 Mar 2024 02:10 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ठाकरे गुट की याचिका को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था। ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका का उल्लेख किया और कहा कि यह कामकाज की सूची में नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट उद्धव ठाकरे गुट की एक याचिका पर सात मार्च को सुनवाई करेगा। बता दें, याचिका में उद्धव ग्रुप की ओर से विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के 10 जनवरी के आदेश को चुनौती दी गई है। नार्वेकर ने जून 2022 में विभाजन के बाद के शिंदे ग्रुप के शिवसेना को असली शिवसेना घोषित किया था, साथ ही विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के ठाकरे ग्रुप की याचिका को भी खारिज कर दिया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें कहा गया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी वाद सुनवाई योग्य है।

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ठाकरे गुट की याचिका को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था। ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका का उल्लेख किया और कहा कि यह कामकाज की सूची में नहीं है। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि मामले को सात मार्च को सूचीबद्ध किया जाए।

पीठ को जल्दी उठना था इसलिए...
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'कई मामले हैं, जिन्हें एक मार्च को सूचीबद्ध किया जाना था, उन्हें सूची में शामिल नहीं किया जा सका क्योंकि पीठ को जल्दी उठना था। इसलिए हम इस मामले में सात मार्च को सुनवाई करने के लिए तैयार हैं।'
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सिब्बल द्वारा इस याचिका का उल्लेख किए जाने के बाद शीर्ष अदालत ने पांच और 12 फरवरी को याचिका पर जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को चुनौती देने वाली ठाकरे ब्लॉक की याचिका पर 22 जनवरी को मुख्यमंत्री शिंदे और उनके समूह के अन्य विधायकों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद कोर्ट ने इसे दो हफ्ते बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे ग्रुप की चुनौती
शिवसेना में विभाजन के बाद शिवसेना नेता व महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे गुट को विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा असली राजनीतिक दल घोषित करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे ग्रुप की ओर से चुनौती दे दी गई है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे ग्रुप की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे समेत उनके ग्रुप के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के ठाकरे ग्रुप की याचिका को भी खारिज कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

ठाकरे के खिलाफ शिंदे ग्रुप ने किया था विद्रोह
दरअसल, पिछले साल ठाकरे के खिलाफ शिंदे ग्रुप ने विद्रोह किया था। बाद में ठाकरे ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2023 को जो फैसला दिया था, उसमें उद्धव ठाकरे सरकार को दोबारा बहाल करने से मना कर दिया था साथ ही कहा था कि स्पीकर के सामने जो अयोग्यता मामले में केस पेंडिंग है उसे तार्किक समय में निपटारा किया जाए। उद्धव ठाकरे ग्रुप की ओर से सुनील प्रभु ने स्पीकर के सामने आवेदन देकर शिंदे ग्रुप के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की गुहार लगाई हुई थी।

मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी वाद सुनवाई योग्य

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें कहा गया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी वाद सुनवाई योग्य है।

शीर्ष अदालत ने ज्ञानवापी समिति की ओर से दाखिल मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी वाद को इस मामले से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ नत्थी किया। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, 'हम इसे मुख्य मामले के साथ जोड़ेंगे।'

शीर्ष अदालत में याचिका अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद द्वारा दायर की गई थी, जो समिति ज्ञानवापी मस्जिद के मामलों का प्रबंधन करती है।

यह है मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर में उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें ज्ञानवापी मस्जिद के स्थल पर मंदिर के 'जीर्णोद्धार' की मांग करने वाले 1991 के एक मुकदमे को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी विवादित स्थान का फैसला केवल अदालत ही कर सकती है। इसने मस्जिद समिति और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा वर्षों से दायर की गई पांच संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। जज जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मालिकाना हक विवाद के मुकदमों को चुनौती देने वाली सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। कोर्ट ने कहा था कि मुकदमा देश के दो प्रमुख समुदायों को प्रभावित करता है।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर 1991 से चल रही है कानूनी लड़ाई
काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी केस में 1991 में वाराणसी कोर्ट में पहला मुकदमा दाखिल हुआ था। याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी गई। प्राचीन मूर्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की ओर से सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय बतौर वादी इसमें शामिल हैं। मुकदमा दाखिल होने के कुछ महीने बाद सितंबर 1991 में केंद्र सरकार ने पूजा स्थल कानून बना दिया। ये कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

सांसदों की 24 घंटे निगरानी वाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बेहतर प्रशासन के लिए सांसद और विधायकों की चौबीसों घंटे डिजिटल निगरानी करने का केंद्र को निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राइट टू प्राइवसी यानी निजता का अधिकार भी कुछ होता है। 
 
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे पी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने पूछा कि क्या अदालत सांसदों के शरीर में चिप लगा सकती है, जिससे कि उनकी 24 घंटे आवाजाही पर नजर रखी जा सके। 

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही प्रधान न्यायाधीश ने दिल्ली निवासी याचिकाकर्ता सुरिंदर नाथ कुंद्रा को आगाह किया कि ऐसे मुद्दे पर न्यायिक समय का दुरुपयोग करने के मामले में उन्हें पांच लाख रुपये का जुर्माना भरने के लिए तैयार रहना चाहिए।
 
पीठ ने कहा, 'अगर आप इस पर बहस करते हैं और हम इस पर सहमत नहीं हुए तो आपसे भू-राजस्व के रूप में पांच लाख रुपये वसूले जाएंगे। यह लोगों का समय है, न कि हमारे अहंकार के बारे में है।' 
 
अदालत ने आगे कहा, 'क्या आपको पता कि आप किस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं? सांसद और विधायकों की चौबीसों घंटे निगरानी करने की बात हो रही है। यह केवल एक सजायाफ्ता अपराधी के लिए किया जाता है जो न्याय से भाग सकता है। निजता का अधिकार भी कुछ है और हम संसद के सभी निर्वाचित सदस्यों की डिजिटल निगरानी नहीं कर सकते।'
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आय से अधिक संपत्ति मामले में पन्नीरसेल्वम की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम की याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने उन्हें और उनके रिश्तेदारों को आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप मुक्त करने के मामले में नोटिस जारी किया था। जस्टिस ऋषिकेष राॅय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा, हाईकोर्ट ने बहुत ही तर्कसंगत आदेश पारित किया है। वह इसमें हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। हालांकि, हम यह मान सकते हैं कि जज की ओर से विवादित आदेश में की गई टिप्पणियों को सिर्फ नोटिस आदेश के उद्देश्य के लिए माना जाना चाहिए। उन टिप्पणियों का आपराधिक पुनरीक्षण पर निर्णय लेने में कोई असर नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने पिछले साल 31 अगस्त को पनीरसेल्वम और उनके कुछ रिश्तेदारों को शुरू किए गए आपराधिक पुनरीक्षण मामले पर नोटिस जारी किया था। 
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