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सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार, कहा- नहीं रोक सकते अदालत की मीडिया रिपोर्टिंग

Mon, 03 May 2021 01:59 PM IST
प्रशांत कुमार राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मद्रास हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब चुनाव आयोग ने देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।हाईकोर्ट ने कहा था कि कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग अकेले जिम्मेदार है और उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह सुनवाई के दौरान जजों द्वारा की जाने वाली मौखिक टिप्पणियों को रिपोर्ट करने से मीडिया को नहीं रोक सकता। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा कि न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करना व्यापक जनहित में है क्योंकि यह जवाबदेही लाती है। शीर्ष अदालत चुनाव आयोग की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा हत्या का मुकदमा दर्ज करने संबंधी टिप्पणी को चुनौती दी है। साथ ही आयोग ने यह भी कहा है कि अदालत द्वारा की जाने वाली मौखिक टिप्पणियों को प्रकाशित करने पर मीडिया पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'न्यायालय में क्या हो रहा है। क्या दिमागी कसरत की जा रही है? इन सभी के बारे में नागरिक जानना चाहते है। इससे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लोगों के विश्वास को बढ़ावा मिलेगा।'

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हाईकोर्ट ने बिना तथ्य और सबूत देखे आयोग पर टिप्पणी की-आयोग
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'हम अपने हाईकोर्ट को हतोत्साहित नहीं करना चाहते हैं। वे हमारी न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दलील पेश किए जाने के दौरान जज और वकीलों के बीच कई तरह के संवाद होते हैं और कई बातें कही जाती है।'  वहीं सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट ने बिना किसी तथ्य व प्रमाण के चुनाव आयोग पर हत्या या मुकदमा करने की बात कही थी।  द्विवेदी ने कहा, 'जब रैलियाँ हो रही थीं, तो हालात इतने बुरे नहीं थे। हमें हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति है। इस टिप्पणी ने बाद मीडिया में इस बार बहस चलने लगी कि हम हत्यारे हैं। सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाने लगा।'

टिप्पणियों को सही भावना के साथ लेने की जरूरत-सुप्रीम कोर्ट
इस पर जस्टिस शाह ने जवाब दिया कि शायद, उपयुक्त शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'हम नहीं जानते कि अचानक आखिर ऐसा क्या हुआ और जज को ऐसा कहना पड़ा।' जस्टिस शाह ने कहा, 'कभी कभी एक के बाद एक आदेश पारित किए जाने के बावजूद अथॉरिटी द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया जाता है। जमीनी हकीकत के आधार पर ऐसी टिप्पणियां की जाती हैं। उन्होंने कहा कि टिप्पणियों को सही भावना के साथ लिया जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने आयोग पर हत्या का केस दर्ज करने की बात कही 
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश जल्द पारित किया जाएगा। मालूम हो कि मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग अकेले जिम्मेदार है और उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।

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