सुप्रीम कोर्ट में जीएसटी कानून से जड़े 281 मुकदमों पर एक साथ सुनवाई हो रही है। शीर्ष अदालत में दंडात्मक प्रावधानों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। धनशोधन निवारण कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, जांच और गिरफ्तारी के लिए एकमात्र शर्त आयुक्त की मंजूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत गिरफ्तारी के मामले में कहा, सिर्फ संदेह के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि कोई भी गिरफ्तारी महज संदेह के आधार पर नहीं, ठोस सामग्री और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी की जाती है, उसे मजिस्ट्रेट को सत्यापित करना चाहिए।
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केंद्र का दावा- जांच एजेंसियां हवा में किसी को गिरफ्तार नहीं करतीं
जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ ने कहा, उचित तरीके से पूछताछ और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के पालन के बाद ही कोई गिरफ्तारी होनी चाहिए। जिस सामग्री के आधार पर गिरफ्तारी हो रही है, उसे आयुक्त की तरफ से प्रमाणित किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू पैरवी कर रहे थे। शीर्ष अदालत की टिप्पणी पर राजू ने कहा, गिरफ्तारियां उचित सबूतों और सामग्री पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां हवा में किसी को गिरफ्तार नहीं करतीं।