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सुप्रीम कोर्ट: अजीम प्रेमजी व अन्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक की अवधि बढ़ाई

Wed, 06 Oct 2021 01:07 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट बंगलूरू की एक अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल प्रेमजी समूह की एक फर्म के साथ तीन कंपनियों के विलय में विश्वास भंग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर शिकायत पर बंगलूरू की एक अदालत ने इन्हें समन जारी किया था। 
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विप्रो के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने विप्रो के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी, उनकी पत्नी और अन्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक की अवधि बढ़ा दी। प्रेमजी और अन्य की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को न्यायालय ने यह आदेश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट बंगलूरू की एक अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल प्रेमजी समूह की एक फर्म के साथ तीन कंपनियों के विलय में विश्वास भंग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर शिकायत पर बंगलूरू की एक अदालत ने इन्हें समन जारी किया था। शिकायत में तीन कंपनियों से एक निजी ट्रस्ट और एक नवगठित कंपनी में 45,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के हस्तांतरण में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।

याचिका में कहा गया कि एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा कथित रूप से गलत इरादे से की गई शिकायत पर बंगलूरू की एक अदालत ने जो समन जारी किया है उसे खारिज करने का आदेश दिया जाए। एनजीओ द्वारा दायर शिकायत में प्रेमजी समूह की कंपनी के साथ तीन कंपनियों के विलय को लेकर विश्वास हनन और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।
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न्यायाधीश एसके कौल और न्यायाधीश एमएम सुंदरेश की पीठ अजीम प्रेमजी और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कर्नाटक हाईकोर्ट के 15 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में निचली अदालत द्वारा 27 जनवरी को जारी समन को खारिज करने से इनकार कर दिया था।

मामले में अब दो दिसंबर को सुनवाई होगी। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने गैर-सरकारी संगठन 'इंडियन अवेक फॉर ट्रांसपरेंसी' और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

प्रेमजी और अन्य ने उच्च न्यायालय के 15 मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें निचली अदालत के 27 जनवरी के समन के आदेश को खारिज करने के आग्रह वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाले अन्य लोगों में पगलथीवर्ती श्रीनिवासन, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक एमआर भट्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट जी वेंकटेश्वर राव शामिल हैं।

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