सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पश्चिम बंगाल सरकार को शहरी बेघरों को लेकर बनी योजना के क्रियान्वयन के लिए रोडमैप पेश करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने यह कहा कि गरीब लोगों की मदद करना राज्य का दायित्व है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने उत्तर प्रदेश व हरियाणा सरकार द्वारा इस संबंध में दाखिल हलफनामे पर गौर करने पर पाया कि इसमें रोडमैप नहीं है। अदालती निर्देश केतहत गुरुवार को हरियाणा के मुख्य सचिव पीठ केसमक्ष पेश हुए। सुनवाई के दौरान पीठ ने हरियाणा सरकार से कहा कि आप दो वर्षों से यह तलाश कर रहे हैं कि रैनबसेरे कहां बनाए जाने चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
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पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह जिक्र नहीं है कि रैनबसेरों में कितने लोग रहेंगे। वहां क्या सुविधाएं होंगी। जवाब में हरियाणा सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस संबंध में एक एजेंसी बनाई गई है। एजेंसी यह बताएगी कि राज्य में कितने लोग बेघर है।
मेहता ने कहा कि वह दो हफ्ते में रोडमैप पेश कर देंगे। पीठ ने यह भी कहा कि हरियाणा में 22 जिले हैं। पानीपत, अंबाला आदि उन जगहों पर रैनबसेरे की भारी दरकार है क्योंकि वहां अधिक संख्या में मजदूर हैं।
वहीं पीठ ने यूपी सरकार केप्रयासों पर भी आपत्ति जताई। पीठ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि जहां वर्ष 2011 में राज्य में करीब 140 रैनबसेरे थे लेकिन अब रैनबसेरों की संख्या घट गई हैं। पीठ ने पाया कि राज्य में 1800 रैनबसेरों की दरकार है। पीठ ने राज्य सरकार को हलफनामे के जरिए रैनबसेरों को लेकर रोडमैप पेश करने केलिए कहा है।