सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा को चुनौती देने वाली चार दोषियों की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ चश्मदीदों के बयान दर्ज होने में देरी के आधार पर उनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट चार आरोपियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
विज्ञापन
जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट्ट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमारे सामने रखे गए रिकॉर्ड से साफ है कि दोषियों ने चश्मदीद गवाहों को डराने की पूरी कोशिश की। इसी डर के कारण इन लोगों ने बयान दर्ज कराने में देरी की। ऐसे में इस देरी को हम गलत नहीं ठहरा सकते। महज इस देरी के कारण इनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता।
आरोपियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उनकी अपीलों को खारिज करने और सत्र न्यायाधीश द्वारा की गई दोषसिद्धि को चुनौती दी थी। आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि दो प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज करने में देरी हुई जो मामले में अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक होगा। इस बारे में भी कोई सफाई नहीं दी गई है कि गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी क्यों हुई।