अदालतों में लंबित लाखों मुकदमों के बीच विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता पर जोर दिया जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने अहम टिप्पणी की है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मध्यस्थों की तटस्थता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीते कुछ वर्षों में अदालतों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए कई अहम उपाय किए हैं। मुकदमे के निपटारे के अलावा मध्यस्थता की प्रक्रिया भी अहम भूमिका निभा रही है। देश की सबसे बड़ी अदालत में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका और निष्पक्षता पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता में विविधता और समावेशन के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करने की जरूरत है। विवाद समाधान तंत्र के रूप में मध्यस्थता ने दुनिया भर में काफी लोकप्रियता हासिल की है। सीमा पार विवादों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता को प्राथमिकता दी जा रही है।
विज्ञापन
दिल्ली मध्यस्थता सप्ताहांत के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि सीजेआई ने कहा, 90 फीसदी से अधिक अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक अनुबंधों में मध्यस्थता समझौते होते हैं। यह अद्वितीय विकास एक तटस्थ मंच बनाने की क्षमता में निहित है जिसे इसमें शामिल सभी पक्ष स्वीकार करने को तैयार हैं। सीजेआई ने कहा, तटस्थता या पूर्वाग्रह की कमी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की ऐसी मूलभूत विशेषता है कि अधिकांश संस्थागत नियमों के अनुसार मध्यस्थ न्यायाधिकरण के सदस्यों की राष्ट्रीयता किसी भी पक्ष के समान नहीं होनी चाहिए। जब तक कि इसके विपरीत सहमति न हो।
सीजेआई ने इस प्रक्रिया में विविधता की वकालत की और कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न पृष्ठभूमि और जीवन के अनुभव वाले व्यक्ति इस प्रक्रिया का हिस्सा हों। सिंगापुर के सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जूडिथ प्रकाश और दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन ने भी सभा को संबोधित किया।