पिछले साल कोरोना महामारी के चलते सीबीएसई कक्षा 12 वीं की परीक्षा नहीं ले सका था। एक फॉर्मूले के आधार पर नतीजे घोषित किए गए। इस पर आपत्ति होने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक विवाद निवारण तंत्र बनाने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीएसई से दो अलग-अलग याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। इसमें आरोप लगाया गया है कि बोर्ड, 12वीं की परीक्षाओं के परिणाम से संबंधित विवाद निवारण तंत्र की प्रक्रिया को ठीक से लागू करने में विफल रहा है।
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कोविड-19 महामारी के कारण 12वीं की परीक्षा रद्द की गई थी और विद्यार्थियों के रिजल्ट के लिए 30:30:40 का फॉर्मूला अपनाया गया था। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के समक्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें केवल दो दिन पहले याचिकाओं की प्रति दी गई है और समय की कमी के कारण वह जवाब दाखिल नहीं कर सके। इसके बाद शीर्ष अदालत ने बोर्ड को 18 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करने निर्देश देते हुए सुनवाई को 20 अक्तूबर तक के लिए टाल दिया।
वकील रवि प्रकाश के माध्यम से दायर याचिकाओं में दावा किया गया है कि बोर्ड विवाद समाधान की प्रक्रिया को लागू करने में विफल रहा है। 17 जून को शीर्ष अदालत ने बोर्ड के नतीजे के उक्त फॉर्मूले को स्वीकार कर लिया था। इसमें बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों का मूल्यांकन दसवीं कक्षा (30% वेटेज), ग्यारहवीं कक्षा (30% वेटेज) और बारहवीं कक्षा प्री बोर्ड परीक्षा (40% वेटेज) में प्रदर्शन के आधार पर तय करने की बात कही गई थी। एक याचिका में दावा किया गया है कि उसे इस फॉर्मूले के हिसाब से कम अंक प्राप्त हुए हैं।