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SC: 'रिहाई के बाद फिर से हिरासत में क्यों लिया गया यूट्यूबर', सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब

Fri, 30 Aug 2024 05:15 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SC: तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील से सीजेआई ने कहा, हम अलग-अलग प्राथमिकियों वाले मामलों को एकसाथ नहीं रखेंगे। जमानत आदेश को देखें और बताएं कि क्यों के जिस दिन उसे रिहा किया जाता है और फिर उसे तुरंत हिरासत में लिया जाता है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार से पूछा कि मशहूर यूट्यूबर सावु्कू शंकर को कई आपराधिक मामलों में रिहाई के तुरंत बाद क्यों गिरफ्तार किया गया। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अगर मामले अलग-अलग और स्वतंत्र हैं, प्राथमिकियों को मिलाया नहीं जा सकता। 

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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ जेल में बंद यूट्यूबर की याचिका पर अगली सुनवाई दो सितंबर को करेगी। 

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। सीजेआई ने उनसे कहा, हम अलग-अलग प्राथमिकियों वाले मामलों को एकसाथ नहीं रखेंगे। जमानत आदेश को देखें और बताएं कि क्यों के जिस दिन उसे रिहा किया जाता है और फिर उसे तुरंत हिरासत में लिया जाता है। रोहतगी ने कहा, मुझे सोमवार को वापस आने दीजिए। 
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पीठ ने गौर किया कि पंद्रह प्राथमिकियों को पहले ही जोड़ दिया गया है। इसने कहा कि वह प्रथम दृष्टया राज्य सरकार द्वारा गुंडा अधिनियम के तहत आरोपी की नए सिरे से हिरासत के पहलू पर विचार करेगी। अदालत ने कहा, आप (रोहतगी) जांच करें कि क्या पंद्रह प्राथमिकियां एक साक्षात्कार से जुड़ी हैं। हम इसे सोमवार को देखेंगे। अदालत ने दोनों पक्षों को संक्षिप्त नोट जमा करने को कहा।



रोहतगी ने कहा, राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि शंकर ने कहा है कि मद्रास उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश भ्रष्ट हैं और यह मामला ऐसा नहीं है, जहां सर्वोच्च न्यायालय को दखल देना चाहिए। रोहतगी ने कहा कि उसने महिला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी बात की है। 

शंकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर. बालासुब्रमण्यम ने रोहतगी की दलीलों का विरोध किया और कहा कि देश में कुल बंदियों में से 51 फीसदी हर साल तमिलनाडु से आते हैं और यह गुंडा अधिनियम के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग को दर्शाता है। शंकर ने राज्य पुलिस द्वारा उनकी नई हिरासत को चुनौती दी है। इसके अलावा उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में प्राथमिकी को रद्द करने की भी मांग की। शीर्ष अदालत ने शुरू में आरोपी से कहा था कि वह उच्च न्यायालय से संपर्क करे। 

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