सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड के नए प्रबंधन को शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एएम सप्रे की सिफारिशों के अनुसार 49 अनुबंध देने व निर्माण गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी। शीर्ष अदालत ने यूनिटेक प्रबंधन को सप्रे की मंजूरी के साथ आगे के ठेके देने और निर्माण कार्य शुरू करने की भी अनुमति दी। अदालत ने संपत्तियों की बिक्री में नए प्रबंधन की सहायता के लिए सप्रे को नियुक्त किया था।
शीर्ष अदालत ने पहले रिफंड का रास्ता चुनने वाले घर खरीदारों को कब्जे के लिए अपना विकल्प बदलने की अनुमति दी है। इसके लिए हालांकि उन्हें ईमेल पर अपना विवरण भेजकर खुद को पंजीकृत करना होगा। साथ ही रिफंड से कब्जे का विकल्प चुनने वाले जिन खरीदारों ने आंशिक रिफंड प्राप्त किया है, उन्हें रिफंड राशि के अगले भुगतान पर अपना विकल्प बदलने की भी अनुमति दी गई है। इसके अलावा, अदालत ने घर खरीदारों को संशोधित भुगतान योजना के अनुसार शेष बकाया का भुगतान करने का निर्देश दिया। ताकि निर्बाध निर्माण के लिए आवश्यक नकदी प्रवाह की उपलब्धता कायम रहे। नए प्रबंधन की ओर से पेश हुए वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने अदालत से कहा कि मामले में कुछ सकारात्मक परिणाम के लिए उसे ये आदेश पारित करने की जरूरत है। उन्होंने अदालत को आगे बताया कि सप्रे ने यह सुनिश्चित करने के लिए काफी प्रयास किए हैं कि ये अनुबंध सही हों। अदालत ने मंजूरी के मुद्दे पर वेंकटरमण और नोएडा के वकीलों को चर्चा करने व आम सहमति बनाने का निर्देश दिया।
2020 में केंद्र को यूनिटेक प्रबंधन अपने हाथ में लेने की मंजूरी दी थी
शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्तूबर में यूनिटेक लिमिटेड के लिए सरकार की ओर से नियुक्त निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक उमा शंकर के नाम को मंजूरी दी थी। मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोपों के बीच 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यूनिटेक का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की इजाजत दी थी। यूनिटेक समूह और उसकी सहायक कंपनियों पर ऑडिट फर्म ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में कहा गया था कि घर खरीदारों के हजारों करोड़ रुपये का पैसा निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए लगाया गया था। कुछ धनराशि साइप्रस जैसे ऑफशोर टैक्स हेवन में भी ठिकाने लगाया गया।