केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्यों को नामित किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सदस्यों के नामों की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। मामले में कानून एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने 31 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की थी।
इन लोगों को सदस्य के रूप में सरकार ने नामित किया है-
- जस्टिस एस मुरलीधर, उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
- वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
- जस्टिस अरुण पल्ली, हरियाणा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष
- वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा
- डॉ मृणाल सतीश, कानून प्रोफेसर, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलोर
- सिद्धार्थ लूथरा, वरिष्ठ अधिवक्ता
- मनन के. मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष
- प्रोफेसर देबाशीष बसु, प्रोफेसर और प्रमुख, मनोचिकित्सा विभाग, पीजीआई, चंडीगढ़
- प्रोफेसर आशा बाजपेयी, संस्थापक डीन, स्कूल ऑफ लॉ, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज
बता दें, समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सेवाएं और मामलों के समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत एनएएलएसए का गठन किया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ संरक्षक-प्रमुख हैं।