सुप्रीम कोर्ट नाव 'सेंट एंटनी' के चालक दल के 10 सदस्यों की उस याचिका पर दो अगस्त को सुनवाई करेगा, जिसमें कहा गया है कि उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए। चालक दल के ये सभी सदस्य दो इतालवी नौसैनिकों द्वारा वर्ष 2012 में केरल तट पर इस नाव पर की गई गोलियों की बौछार से बच गए थे। गोलीबारी में नाव पर सवार उनके दो साथियों की मौत हो गई थी।
चालक दल के इन 10 सदस्यों ने अपनी याचिका में कहा है कि इटली गणराज्य द्वारा भुगतान किए गए 10 करोड़ रुपये के मुआवजे में से एक पैसा भी उन तक नहीं पहुंचा है। शुक्रवार को यह मामला जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। पीठ ने याचिका पर दो अगस्त को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
गत 15 जून को सुप्रीम कोर्ट ने इटली गणराज्य द्वारा 10 करोड़ रुपये का भुगतान करने के बाद दो इतालवी नौसैनिक मासिमिलियानो लातोरे और सल्वाटोर गिरोन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद करने पर सहमति व्यक्त की थी। यह आदेश 'इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी' द्वारा मई, 2020 में इटली में दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने के निर्णय को देखते हुए दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने इटली को गोलीबारी के कारण जान की क्षति, शारीरिक नुकसान, भौतिक क्षति और नैतिक नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया था। 10 करोड़ रुपये में से मारे गए दो मछुआरों के परिवारों को चार-चार करोड़ रुपये देने के लिए कहा गया था जबकि शेष दो करोड़ रुपये नाव के मालिक के लिए अलग रखे गए थे।
उस गोलीबारी में बच निकलने वाले चालक दल के 10 लोगों का कहना है कि गोलियों ने नाव के बाहरी हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया था। उनका कहना है कि नाव की कीमत केवल 10 लाख रुपये थी। 2012 में नाव मालिक को अनुग्रह राशि के रूप में 17 लाख रुपये मिल चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि नाव मालिक को मिले दो करोड़ रुपये में उन्हें भी हिस्सा मिलना चाहिए। इन लोगों ने 'नैतिक नुकसान' के आधार पर मुआवजे की मांग की है।