वहीं शिवसेना के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने अपने बयान से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाने के बाद गुरुवार को अपना बयान वापस ले लिया। राउत का कहना है कि हमारे कांग्रेस दोस्तों को दुखी होने की जरूरत नहीं है।
करीम लाला से मिलने जाती थीं इंदिरा गांधी वाले बयान पर राउत ने कहा कि कांग्रेस में हमारे मित्रों को आहत होने की जरूरत नहीं है। यदि किसी को लगता है मेरे बयान से इंदिरा गांधी की छवि धक्का पहुंचा है या इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं अपना बयान वापस लेता हूं।
महाराष्ट्र के मंत्री और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने संजय राउत के बयान पर कहा कि उनका बयान गलत था लेकिन उन्होंने इसे वापस ले लिया है इसलिए मामला खत्म हो गया है। उन्हें भविष्य में सावधानीपूर्वक रहना होगा। हमने उन्हें (उद्धव ठाकरे को) इससे अवगत कराया था।
संजय राउत ने गुरुवार को सफाई देते हुए कहा कि मुंबई के इतिहास की समझ न रखने वालों ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ डाला। राउत के अनुसार, उनके कहने का आशय यह था कि करीम लाला पठान समुदाय के प्रतिनिधि थे और उनकी इसी हैसियत के कारण उनसे पूर्व प्रधानमंत्री की मुलाकात की वजह थी।