सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा शुक्रवार को जगतपुर इंटर कॉलेज के मैदान पर अपने कर्मचारियों और निवेशकों से ‘आभार यात्रा’ में मुखातिब हुए और सेबी की कार्रवाई को गलत बताते हुए अपना पक्ष रखा। लगभग पांच हजार कार्यकर्ताओं और निवेशकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 30 माह से सहारा समूह एक प्रतिबंध के तले दबा हुआ है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर सहारा कोई भी संपत्ति उधार रखकर या बेचकर रकम जुटाता है तो पूरा धन सेबी-सहारा के खाते में ही जाएगा। सहारा अपने समूह के लिए एक भी रुपया नहीं जुटा सकता। यही कारण है कि आज सहारा को अपने कार्यकर्ताओं का वेतन एवं अन्य नियामक दायित्व को पूरा करने में कठिनाई हो रही है।
सहारा प्रमुख ने कहा कि हमसे अपेक्षा की जा रही है कि हम चलें, जबकि हमारे हाथ-पैर बंधे हुए हैं। इसके बाद सवाल भी उठ रहे हैं कि वे चल क्यों नहीं रहे हैं। कहा कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। न्याय किन्हीं वास्तविक व अन्य कारणों से भले देर से मिले, अंतत: न्याय होता जरूर है। कहा, सहारा-सेबी मामले में पिछले 43 महीने में निवेशकों को मात्र 50 करोड़ रुपये ही लौटाए गए हैं।