मंगलवार शाम को स्वामी ने ट्वीट कर सत्ता के ‘गैंग ऑफ फोर’ पर अंगुली उठाई, जो उनके अनुसार जुलाई 2019 से पहले रॉ, सीबीआई, इनकम टैक्स, रिजर्व बैंक और ईडी जैसी प्रमुख एजेंसियों में अपने लोग बैठाना चाहता है ताकि अगर भाजपा को 220 से कम सीटें मिलती हैं तो कांग्रेस से प्रति किसी नरम व्यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया जा सके।
यह भी महज संयोग नहीं हो सकता कि अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले में दो प्रमुख आरोपी सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसाद के पिता देवेश्वर प्रसाद रॉ के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और ये दोनों जांच एजेंसियों में अपने संपर्कों के जरिए बड़े मामलों की दलाली करते थे। यही नहीं एफआईआर में भी रॉ के विशेष सचिव सामंत गोयल का नाम है।
वहीं, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ अपनी शिकायतें अस्थाना लगातार सीवीसी को भेजते रहे। लेकिन अभी तक सीवीसी ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई की और न ही बीच बचाव की कोई कोशिश। माना जा रहा है कि वर्मा को सरकार के ही वरिष्ठ लोगों का समर्थन प्राप्त है।
प्रधानमंत्री जरूर सीबीआई निदेशक से दो बार मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन उनके बीच क्या बात हुई, यह किसी तीसरे को नहीं पता। हां, इस बीच सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआईआर में धोखाधड़ी और वसूली की धाराएं और जोड़ने की इजाजत मांगी है। यानी इस युद्ध की गाथा के कई अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं।