संक्रमित होने के एक से दो सप्ताह बाद सार्स सीओवी-2 वायरस का आमतौर पर ऊपरी श्वसन नली में पता नहीं चल पाता, लेकिन कुछ वायरस संक्रमण पैदा करने के बाद शरीर में गुप्त और अज्ञात तरीके से बने रहते हैं।
कोरोना वायरस संक्रमित के फेफड़ों में करीब दो साल रह सकता है। यह दावा एक चिकित्सा अध्ययन में सामने आया है, जो नेचर इम्यूनोलॉजी जर्नल ने प्रकाशित किया है। अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 का कारण बनने वाला वायरस सार्स सीओवी-2 कुछ व्यक्तियों के फेफड़ों में संक्रमण के बाद 18 से 24 महीने तक रह सकता है।
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संक्रमित होने के एक से दो सप्ताह बाद सार्स सीओवी-2 वायरस का आमतौर पर ऊपरी श्वसन नली में पता नहीं चल पाता, लेकिन कुछ वायरस संक्रमण पैदा करने के बाद शरीर में गुप्त और अज्ञात तरीके से बने रहते हैं। भले ही यह ऊपरी श्वसन पथ या रक्त में अवांछनीय रहता है। यह एचआईवी के मामले जैसा है, जो कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाओं में गुप्त रहता है और किसी भी समय पुनः सक्रिय हो सकता है।
एनके कोशिकाओं की संक्रमण नियंत्रण रखने में अहम भूमिका
प्रो मुलर-ट्रुटविन ने कहा कि जन्मजात प्रतिरक्षा की सेलुलर प्रतिक्रिया का सार्स सीओवी 2 संक्रमणों में बहुत कम अध्ययन किया गया है। फिर भी लंबे समय से ज्ञात है कि एनके कोशिकाएं वायरल संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पशु मॉडलों के जैविक नमूनों के विश्लेषण में पाया कि फेफड़ों में लगातार बने रहने वाले वायरस की मात्रा मूल सार्स सीओवी 2 स्ट्रेन की तुलना में ओमिक्रॉन स्ट्रेन के लिए कम थी।