यूक्रेन वंदे भारत जैसी ट्रेनों के व्हील के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। व्हील बनाने वाली कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी-अधिकारी रूस का मुकाबला करने के लिए जंग के मैदान में हैं। इसके चलते कंपनी उत्पादन बंद कर चुकी है।
वंदे भारत ट्रेनों के सैकड़ों व्हील के सेट रूस से जारी युद्ध के चलते यूक्रेन की एक कंपनी में अटके पड़े हैं। सूत्रों का कहना है कि 128 व्हील सड़क मार्ग के जरिये पड़ोसी मुल्क रोमानिया पहुंचाए गए हैं। इन्हें अगले महीने ट्रायल के लिए एयरलिफ्ट कर भारत लाया जाएगा।
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सूत्रों का कहना है कि इस साल के अंत तक देश में प्रमुख रूटों पर 75 सेमी हाई स्पीड वाली ट्रेनों को शुरू करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब चेक रिपब्लिक, पोलैंड और अमेरिका को भी व्हील के आर्डर दिए गए हैं। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर भारत चीन को भी आर्डर दे सकता है।
यूक्रेन वंदे भारत जैसी ट्रेनों के व्हील के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। व्हील बनाने वाली कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी-अधिकारी रूस का मुकाबला करने के लिए जंग के मैदान में हैं। इसके चलते कंपनी उत्पादन बंद कर चुकी है। ऐसे में इस साल दर्जनों नई वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने की रेलवे की योजना संकट में पड़ सकती है। रेलवे ने 16 मिलियन डॉलर की लागत से 36000 व्हील के निर्माण का आर्डर यूक्रेन की एक कंपनी को दिया था। सूत्रों का कहना है कि भुगतान लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिये किया गया था।
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उनका कहना है कि व्हील को यूक्रेन के ब्लैक सी पोर्ट से महाराष्ट्र के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट लाने की योजना बनाई गई थी लेकिन युद्ध के चलते यह संभव नहीं हो सका। हालांकि सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय की कोशिशों से दो ट्रेनों के ट्रायल के लिए 128 व्हील सड़क के जरिये रोमानिया पहुंच चुके हैं। रेलवे बोर्ड के सीईओ व चेयरमैन वीके त्रिपाठी ने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों के विनिर्माण में कोई देरी नहीं है। व्हील और एक्सल जैसे आवश्यक सामान भी समय पर उपलब्ध होंगे। व्हील में इस्तेमाल होने वाले एक्सल का निर्माण बेंगलुरु स्थित रेलवे व्हील फैक्टरी में होता है।