चीन में करीब 565 मीट्रिक टन बढ़ा कार्बन उत्सर्जन
आईईए ने कहा कि वैश्विक उर्जा संबंधी कार्बन उत्सर्जन 2023 में 1.1 फीसदी बढ़ गया। जिससे यह 410 मिलियन टन (एमटी) बढ़ने के साथ 37.4 गीगाटन (जीटी) के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसने कहा कि चीन में उर्जा संबंधी कार्बन उत्सर्जन करीब 565 मीट्रिक टन बढ़ा। वैश्विक स्तर पर यह सबसे बड़ी वद्धि है। चीन में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अब उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में 15 फीसदी अधिक है।
कमजोर मानसून से बिजली की मांग में वृद्धि
रिपोर्ट में कहा गया, भारत में मजबूत जीडीपी वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन करीब 19 करोड़ टन बढ़ गया है। लेकिन कमजोर मानसून से बिजली की मांग में वृद्धि हुई और पनबिजली उत्पादन में कटौती की गई। भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से काफी नीचे है। भारत 2023 में पूरे वर्ष गर्मी और सूखे की परिस्थितियों से जूझता रहा और कमजोर मानसून के मौसम का अनुभव हुआ। जिसमें अगस्त में कम से कम 45 वर्षों ज्यादा सूखा रहा।
ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की जरूरत
आईईए के मुताबिक, वर्ष 2022 में उर्जा संबंधी वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 490 मीट्रिक टन की वृद्धि हुई, जो 1.3 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) के मुताबिक, देशों को ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए मिलकर 2030 तक कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 43 फीसदी की कटौती करने की जरूरत है। आईईए की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 2023 में 65 फीसदी से ज्यादा के लिए कोयले से कार्बन का उत्सर्जन शामिल है।