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US: ‘संघर्ष के समय रणनीतिक स्वायत्तता का कोई मतलब नहीं’, पीएम मोदी के रूस दौरे पर बोले अमेरिकी राजदूत गार्सेटी

Thu, 11 Jul 2024 06:41 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पसंदीदा विदेश नीति (रणनीतिक स्वायत्तता) को पसंद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के समय में ऐसी रणनीतिक स्वायत्तता का कोई मतलब नहीं रह जाता।

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एरिक गार्सेटी, भारत में अमेरिकी राजदूत - फोटो : ANI
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विस्तार
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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस की यात्रा की। मॉस्को में आयोजित एक संयुक्त वार्ता में पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी अपनी बात रखी थी। पीएम मोदी ने कहा था कि बम, बंदूक और गोलियों के बीच शांति वार्ता नहीं की जा सकती। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि बातचीत के जरिए ही किसी भी युद्ध का हल निकाला जा सकता है। हालांकि, इसके बाद दुनिया के अलग-अलग देशों ने पीएम मोदी के रूस दौरे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं थीं और इनमें अमेरिका भी शामिल था। 

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‘संघर्ष के समय रणनीतिक स्वायत्तता का कोई मतलब नहीं’
अब भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पसंदीदा विदेश नीति (रणनीतिक स्वायत्तता) को पसंद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के समय में ऐसी रणनीतिक स्वायत्तता का कोई मतलब नहीं रह जाता। गार्सेटी के अनुसार, ‘भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को पसंद करता है और मैं इसका सम्मान करता हूं। लेकिन, संघर्ष के समय में रणनीतिक स्वायत्तता का कोई मतलब नहीं रह जाता। हमें, मुश्किल समय में  एक-दूसरे को जानने की आवश्यकता है। हमें यह जानने की आवश्यकता है कि हम एक-दूसरे के सहयोगी हैं।’ 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा था?
आपको बता दें कि गार्सेटी से पहले अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर का भी बयान सामने आया था। मिलर ने कहा था कि वे भारत से यह स्पष्ट करने का आग्रह करेंगे कि रूस-यूक्रेन में संघर्ष का समाधान होना चाहिए। ऐसा समाधान, जो यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के विचारों का सम्मान करता हो।  
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‘संबंधों को मजबूत करने के लिए सार्थक प्रयासों पर दें जोर’
एरिक गार्सेटी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने के लिए जितने सार्थक प्रयास किए जाएंगे, उनका परिणाम भी उतना ही सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि रिश्तों को मजबूत करने के बजाय अगर दोनों देश, अच्छे संबंधों के बजाय एक-दूसरे की निंदा करेंगे तो परिणाम अच्छे नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा के वे दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए युद्धस्तर पर काम करेंगे।

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