एक समय था, जब रिंकू कांग्रेस के लिए सियासत के पिच पर बैटिंग करते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें बाहर निकाला तो उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। आइए रिंकू की पूरी कहानी जानते हैं...
ये कहानी है आम आदमी पार्टी (AAP) के इकलौते नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद सुशील कुमार रिंकू की। हाल के दिनों में रिंकू काफी चर्चा में आए हैं। वह लोकसभा में आम आदमी पार्टी के इकलौते सदस्य हैं। एक समय था, जब रिंकू कांग्रेस के लिए सियासत के पिच पर बैटिंग करते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें बाहर निकाला तो उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। आइए रिंकू की पूरी कहानी जानते हैं...
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परिवार कांग्रेसी था, खुद कांग्रेस से शुरू की राजनीति
पांच जून 1975 को सुशील कुमार रिंकू का जन्म जालंधर में हुआ था। रिंकू का पूरा परिवार कांग्रेसी था। रिपोटर्स के मुताबिक, उनके चाचा और पिता ने लगभग हर विधानसभा और संसद चुनाव में पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम किया। 1977 में आपातकाल के दौरान, उनके पूरे परिवार को कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने के लिए जेल में डाल दिया गया था।
एनएसयूआई से शुरू की राजनीति
रिंकू ने अपने सियासी सफर की शुरुआत कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से की। 1990 में वह एनएसयूआई के सक्रिय सदस्य रहे। 1992 में पंजाब में उपचुनाव हुए तो सुशील कुमार रिंकू ने युवाओं को कांग्रेस से जोड़ा। बूथ स्तर पर नेताओं को जोड़ा।
1994 में सुशील रिंकू को डीएवी कॉलेज जालंधर में श्री गुरु रविदास की सांस्कृतिक सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। साल 2002 में लोकसभा चुनाव के दौरान कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने खूब मेहनत की। तब वह पार्टी के बड़े नेताओं की नजर में आए।
2006 में पहली बार पार्षद बने
2006 में पहली बार निकाय चुनाव लड़े और पार्षद चुने गए। 2500 वोटों से जीत हासिल की। 2017 में उन्हें कांग्रेस ने जालंधर पश्चिम से टिकट दिया और वह विधायक चुन लिए गए। हालांकि, 2022 चुनाव में रिंकू को हार का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस ने निकाला तो 24 घंटे में आप से टिकट मिल गया, 38 दिन में सांसद बन गए
सुशील कुमार रिंकू को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कांग्रेस ने पांच अप्रैल को निष्कासित कर दिया। इसके ठीक अगले दिन यानी छह अप्रैल को रिंकू ने आम आदमी पार्टी का दामन थामा और उन्हें टिकट भी मिल गया। 10 मई को जालंधर में लोकसभा का उपचुनाव हुआ। 13 मई को नतीजे आए और 38 दिन के अंदर रिंकू सांसद बन गए। रिंकू 57 हजार से ज्यादा वोटों से जीते। दूसरे स्थान पर कांग्रेस की करमजीत कौर चौधरी रहीं। वहीं तीसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन के सुखविंदर सुखी और चौथे पर बीजेपी के इंदर इकबाल अटवाल रहे।