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Congress: 'तकनीक को हथियार न बनाएं', मनरेगा भुगतान के लिए आधार-आधारित प्रणाली की कांग्रेस का केंद्र पर हमला

Mon, 01 Jan 2024 03:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Congress: कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के भुगतान के लिए आधारित आधारित प्रणाली की आलोचना की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार प्रौद्योगिकी को हथियार बना रही है। 
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जयराम रमेस (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मनरेगा भुगतान के लिए आधार आधारित प्रणाली को कथित तौर पर अनिवार्य किए जाने के बीच कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि सरकार को प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी), खासतौर पर आधार को हथियार बनाना बंद करना चाहिए, जिससे देश के सबसे कमजोर तबके के लोगों को उनके सामाजिक कल्याण के लाभों से वंचित न किया जा सके। 

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिए आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के जरिए भुगतान को अनिवार्य करने के लिए तय समय सीमा का पांचवां विस्तार 31 दिसंबर, 2023 को खत्म हो गया।

उन्होंने कहा, 'कुल 25.69 करोड़ मनरेगा श्रमिक हैं। जिनमें से 14.33 करोड़ को सक्रिय श्रमिक माना जाता है। 27 दिसंबर तक कुल पंजीकृत श्रमिकों में से 34.8 फीसदी (8.9 करोड़) और 12.7 फीसदी सक्रिय कार्यकर्ता (1.8 करोड़) अभी भी आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के लिए अयोग्य हैं।'

उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरी भुगतान के लिए एबीपीएस का इस्तेमाल करने में श्रमिकों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं द्वारा उजागर की गई कई चुनौतियों के बावजूद मोदी सरकार ने प्रौद्योगिकी के साथ अपने विनाशकारी प्रयोगों को जारी रखा है। उन्होंने आरोप लगाया, यह करोड़ों सबसे गरीब और वंचित भारतीयों को बुनियादी आय हासिल करने से बाहर रखने के लिए प्रधानमंत्री का नए साल का क्रूर तोहफा है।

रमेश ने कहा कि 30 अगस्त, 2023 को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक एडवाइजरी में कुछ संदिग्ध दावे किए गए हैं। जैसे जॉब कार्ड को इस आधार पर नहीं हटाया जाएगा कि श्रमिक एपीबीएस के लिए पात्र नहीं है और कुछ परामर्श में विभिन्न हितधारकों ने एबीपीएस को मजदूरी भुगतान करने के लिए सबसे अच्छा मार्ग पाया है। रमेश ने कहा कि इसमें यह भी दावा किया गया है कि एबीपीएस श्रमिकों को समय पर वेतन प्राप्त करने में मदद करता है और लेनदेन अस्वीकृति से बचाता है।
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उन्होंने कहा, सबसे पहले अप्रैल 2022 से 7.6 करोड़ पंजीकृत श्रमिकों को आधार आधारित प्रणाली से हटा दिया गया था। चालू वित्त वर्ष के नौ महीने में 1.9 करोड़ पंजीकृत श्रमिकों को प्रणाली से हटा दिया गया है। हटाए गए कर्मचारियों के जमीनी सत्यापन से पता चला है कि आधार प्रमाणीकरण और एबीपीएस को लागू करने की मोदी सरकार की जल्दबाजी के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। रमेश ने कहा कि मंत्रालय को स्पष्ट करना चाहिए कि ये 'हितधारक' कौन थे और ये विचार-विमर्श कब हुए। 
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