मुरादाबाद शहर के पीली कोठी चौराहे पर वरुण गांधी के भाषण के लिए तैयार मंच अचानक टूट गया। अपने चहेते के चक्कर में उत्साही नेताओं ने ही मंच ढहा दिया। एक पार्टी कार्यकर्ता मंच पर ही गिर गया। गनीमत थी कि मंच पर चढ़ने के लिए वरुण गांधी ने कदम बढ़ाया ही था लेकिन मंच टूटने पर बगल में खड़े सांसद सर्वेश सिंह ने वरुण गांधी का हाथ पकड़कर लिया और वह पीछे खड़े हो गए।
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तस्वीरें: अचानक टूट गया वरुण गांधी का मंच, मची अफरातफरी
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लोगों को संबोधित करते वरुण गांधी
- फोटो : अमर उजाला
मेयर बीना अग्रवाल सहित अन्य महिला नेता भी मंच से बचते हुए दूसरे किनारे पर जा खड़ी हुई। जिस तरफ से वरुण गांधी मंच पर चढ़ रहे थे उसी किनारे पर मंच टूटा था। दरअसल वरुण गांधी का काफिला पहुंचते ही पार्टी नेता और कार्यकर्ता जोश में आ गए। जैसे ही वरुण कार से उतरे, भीड़ से बुरी तरह घिर गए।
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मुरादाबाद में वरुण गांधी
- फोटो : अमर उजाला
उधर कई नेता और कार्यकर्ता फूलमाला लेकर मंच की एक साइड से ऊपर चढ़ गए। दबाव बढ़ते ही मंच अचानक टूट गया। इसके बाद अधिकतर नेताओं, कार्यकर्ताओं को सख्ती से मंच से उतारा गया। सांसद सर्वेश सिंह पहले मंच पर चढ़े और मंच का अन्य हिस्से के सुरक्षित होने की पुष्टि कर वरुण गांधी को आगे बुलाया।
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मुरादाबाद में वरुण गांधी लोगों से मिलते हुए
- फोटो : अमर उजाला
यूपी में ऐसी राजनीति को जन्म देना चाहता हूं जिससे समाज के कमजोर व्यक्ति को भी उसका हक मिले। नफरत नहीं, प्यार की राजनीति हो। यूपी में नौकरी बेची जा रही है। पुलिस और अफसर जनता का उत्पीड़न कर रहे हैं। बेटियां असुरिक्षत हैं। यह पाप है। इसी जन्म में पाप पूरा होता है। मैं पुण्य करने के लिए राजनीति में आया हूं।
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लोगों को संबोधित करते हुए वरुण गांधी
- फोटो : अमर उजाला
गरीब, किसान, शिक्षित बेरोजगारों की पीड़ा का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद वरुण गांधी ने ढाकी गांव की जनसभा में यह बात कही। वह यहां तंगहाली से खुदकुशी करने वाले तीन किसानों के परिजनों को आर्थिक मदद देने आए थे। इससे पूर्व शहर के पीलीकोठी चौराहे पर वरुण गांधी का स्वागत मंच भीड़ के दबाव से टूट गया जिससे भगदड़ मच गई। वरुण गांधी ने कहा कि जब जनता का उत्पीड़न रुकेगा तभी प्रदेश आगे बढ़ेगा।
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मृतक किसान राजकुमार के परिवार वालों को चेक देते वरुण गांधी
- फोटो : अमर उजाला
जैसा सपना मैं अपनी एक वर्ष की बेटी के लिए देखता हूं, वैसा ही सपना खुदकुशी करने वाले मजदूर राजकुमार के बच्चों के लिए भी देखता हूं। गरीबों को अंग बेचने पड़ रहे हैं। बुंदेलखंड में लोग घास खाकर जी रहे हैं। मात्र 40 हजार कर्ज लेने वाला किसान दबाव के चलते खुदकुशी को मजबूर है। 10 हजार करोड़ कर्ज लेकर लोग मौज कर रहे हैं। यूपी में इतनी बेरोजगारी है कि पीएचडी कर युवा सफाई कर्मी की नौकरी का आवेदन करने को मजबूर है। उन्होंने यूपी में नेतृत्व को दिल में इंसानियत पैदा करने की नसीहत भी दी।