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श्रीलंका: एक देश-एक कानून के लिए टास्क फोर्स गठित, कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु को शामिल करने पर विवाद

Wed, 27 Oct 2021 06:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

‘एक देश एक कानून’ 2019 के आम चुनाव में राजपक्षे का नारा था। इसी नारे की बदौलत उन्हें चुनाव में देश की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी की तरफ से भारी समर्थन मिला था।
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गलागोदाथ ज्ञानसारा की पहचान श्रीलंका में कट्टर बौद्ध भिक्षु की है। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने एक देश, एक कानून की अवधारणा को लागू करने के लिए 13 सदस्यों की एक टास्क फोर्स का गठन किया है। हालांकि, इसके नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, राजपक्षे द्वारा गठित इस टास्क फोर्स का प्रमुख एक कट्टर बौद्ध भिक्षु को बनाया गया, जिन्हें उनके मुस्लिम विरोधी रुख के लिए पहचाना जाता है। 
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‘एक देश एक कानून’ 2019 के आम चुनाव में राजपक्षे का नारा था। इसी नारे की बदौलत उन्हें चुनाव में देश की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी की तरफ से भारी समर्थन मिला था। चुनाव जीतने के बाद राजपक्षे ने ‘एक देश एक कानून’ अवधारणा की स्थापना के लिए कोशिशें शुरू भी कीं और आखिरकार विशेष राजपत्र के द्वारा उन्होंने टास्क फोर्स नियुक्त कर दी। इसका नेतृत्व गलागोदाथ ज्ञानसारा कर रहे हैं, जिनकी पहचान एक कट्टर बौद्ध भिक्षु की है। ज्ञानसारा देश में मुस्लिम विरोधी भावना का प्रतीक बने हुए हैं।

मुस्लिम विरोधी दंगे में शामिल होने का है आरोप
ज्ञानसारा के बोदु बाला सेना (बीबीएस) या बौद्ध शक्ति बल पर 2013 में मुस्लिम विरोधी दंगे में शामिल होने का आरोप लगा था। इस टास्क फोर्स में चार मुस्लिम विद्वान सदस्य के तौर पर हैं, लेकिन अल्पसंख्यक तमिलों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। टास्क फोर्स इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट 28 फरवरी, 2022 को जमा करेगा। इसके अलावा हर महीने कार्य प्रगति के बारे में राष्ट्रपति को जानकारी देगा।
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