बता दें कि उस दौरान राज्यसभा में बहस के वक्त कांग्रेस के दिग्गज नेता जयराम रमेश और आनंद शर्मा आमने-सामने आ गए थे। दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर आनंद शर्मा ने तत्कालीन आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद से कुछ सवाल पूछे थे। उस दौरान जयराम नरेश ने आनंद शर्मा से कहा कि वह मुद्दे से जुड़े हुए सवाल ही पूछें, जिस पर आनंद शर्मा भड़क गए। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं सवाल कैसे पूछे जाते हैं। आपको मुझे बताने की जरूरत नहीं है। इसके बाद तमाम तनाव के बावजूद सदन में ठहाके गूंज उठे थे।
यह है ताजा मसला
जानकारी के मुताबिक, देश में 300 नंबरों की जासूसी पेगासस सॉफ्टवेयर से कराए जाने का दावा किया जा रहा है। ये नंबर केंद्र सरकार में मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, 40 पत्रकारों, सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश समेत जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि के बताए जा रहे हैं। हालांकि, संयुक्त रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा गया कि इन नंबरों की जासूसी की गई या नहीं। इसके अलावा पेगासस सॉफ्टवेयर बेचने वाली कंपनी का कहना है कि इस हैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिर्फ अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ किया जाता है। वहीं, केंद्र सरकार ने भी जासूसी के दावों को खारिज किया। सरकार की तरफ से कहा गया कि देश में किसी का भी फोन गैरकानूनी रूप से हैक नहीं किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी चिट्ठी में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर तयशुदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही किसी का फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है।