फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेगासस: नवंबर 2019 में पहली बार उछला था जासूसी कांड, आपस में ही भिड़ गए थे कांग्रेस के ये दिग्गज नेता

Mon, 19 Jul 2021 02:36 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2019 के दौरान भी व्हाट्सएप के जरिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सुर्खियों में थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार ने इस्राइल से हैकिंग सॉफ्टवेयर पेगासस खरीदा और उससे करीब 100 नामचीन लोगों की जासूसी की गई। यह मामला सामने आते ही घमासान छिड़ गया था और सरकार बैकफुट पर नजर आई थी। उस वक्त संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा था। 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट समेत 16 मीडिया संस्थानों की संयुक्त जांच में किए गए दावे के बाद पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी का जिन्न एक बार फिर देश की सियासत में हलचल मचा रहा है। दावा किया जा रहा है कि भारत में 300 वेरिफाइड मोबाइल नंबरों पर पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष ने इस मसले पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, लेकिन यह पहली बार नहीं है कि जब पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर घमासान छिड़ा है। दरअसल, 2019 के दौरान भी पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी की बात सामने आई थी। उस वक्त कांग्रेस के दिग्गज नेता आनंद शर्मा और जयराम नरेश पेगासस पर सवालात को लेकर भिड़ गए थे। 

विज्ञापन


2019 में क्या हुआ था?
बता दें कि 2019 के दौरान भी व्हाट्सएप के जरिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सुर्खियों में थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार ने इस्राइल से हैकिंग सॉफ्टवेयर पेगासस खरीदा और उससे करीब 100 नामचीन लोगों की जासूसी की गई। यह मामला सामने आते ही घमासान छिड़ गया था और सरकार बैकफुट पर नजर आई थी। उस वक्त संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा था। 



उस वक्त सरकार ने दिया था यह जवाब?
2019 में पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने संसद के सदन में अपना जवाब दिया था। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि मेरी जानकारी के हिसाब से किसी भी गैरकानूनी तरीके से जासूसी नहीं की गई। हालांकि, सरकार ने पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदने के मुद्दे पर चुप्पी साध ली थी और कहा था कि वह देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

आमने-सामने आ गए थे आनंद शर्मा और जयराम नरेश

बता दें कि उस दौरान राज्यसभा में बहस के वक्त कांग्रेस के दिग्गज नेता जयराम रमेश और आनंद शर्मा आमने-सामने आ गए थे। दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर आनंद शर्मा ने तत्कालीन आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद से कुछ सवाल पूछे थे। उस दौरान जयराम नरेश ने आनंद शर्मा से कहा कि वह मुद्दे से जुड़े हुए सवाल ही पूछें, जिस पर आनंद शर्मा भड़क गए। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं सवाल कैसे पूछे जाते हैं। आपको मुझे बताने की जरूरत नहीं है। इसके बाद तमाम तनाव के बावजूद सदन में ठहाके गूंज उठे थे। 

यह है ताजा मसला
जानकारी के मुताबिक, देश में 300 नंबरों की जासूसी पेगासस सॉफ्टवेयर से कराए जाने का दावा किया जा रहा है। ये नंबर केंद्र सरकार में मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, 40 पत्रकारों, सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश समेत जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि के बताए जा रहे हैं। हालांकि, संयुक्त रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा गया कि इन नंबरों की जासूसी की गई या नहीं। इसके अलावा पेगासस सॉफ्टवेयर बेचने वाली कंपनी का कहना है कि इस हैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिर्फ अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ किया जाता है। वहीं, केंद्र सरकार ने भी जासूसी के दावों को खारिज किया। सरकार की तरफ से कहा गया कि देश में किसी का भी फोन गैरकानूनी रूप से हैक नहीं किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी चिट्ठी में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर तयशुदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही किसी का फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें