Hybrid Motorcycle made by students in Gujarat
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ऐसे समय में जब पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं और लोग पारपंरिक ईंधन के विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों का रूख कर रहे हैं, गुजरात से एक अच्छी खबर आई है। प्रदेश के एक कॉलेज के छात्रों के एक समूह ने एक रेगुलर मोटरसाइकिल को बतौर इलेक्ट्रिक इस्तेमाल करने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया है। उनका दावा है कि मोटरसाइकिल पेट्रोल और बिजली दोनों से चल सकती है।
ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों का असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। आम लोगों की समस्या को दूर करने के लिए, गुजरात के राजकोट में छात्रों की एक टीम ने एक हाइब्रिड मोटरसाइकिल बनाई है जो न सिर्फ पेट्रोल पर बल्कि इलेक्ट्रिक पर भी दौड़ सकती है। बस हैंडलबार पर एक स्विच को टॉगल करके, बाइक सवार पेट्रोल या इलेक्ट्रिक बैटरी का ऑप्शन चुन सकता है। टीम का कहना है कि एक बार फुल चार्ज करने पर मोटरसाइकिल करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।
सबसे खास बात यह है कि यह हाइब्रिड मोटरसाइकिल चार्जिंग के लिए सिर्फ एक यूनिट बिजली का इस्तेमाल करती है, जिसकी लागत 17 पैसे आती है। इस अनोखे प्रयोग को अंजाम देने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स की टीम राजकोट के वीवीपी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र हैं। ये सभी छात्र अपने सातवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहे हैं।
वीवीपी इंजीनियरिंग कॉलेज में मैकेनिकल विभाग के डीन डॉ मनियर ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा, "इसे विकसित करने का मुख्य कारण यह है कि ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ई-वाहनों के साथ कई मुद्दे हैं जैसे उच्च कीमत, स्लो चार्जिंग आदि। इसलिए हमने एक ऐसे वाहन के बारे में सोचा जो दोनों पर चल सके।"
डीन ने कहा, "छात्रों ने चार अलग-अलग बैटरी जोड़ी हैं। बैटरी को पूरी तरह से चार्ज होने में छह घंटे का समय लगता है। फुल चार्ज बैटरी 17 पैसे की लागत से एक यूनिट बिजली का उपयोग करके 40 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार के साथ 40 किलोमीटर तक चल सकती है।"
इस हाइब्रिड बाइक में राइडर के पास या तो बैटरी पर या पेट्रोल पर बाइक चलाने का विकल्प होगा जिसके लिए दो अलग-अलग स्विच दिए गए हैं।
यह कॉन्सेप्ट McLaren P1 (मैकलारेन पी1) जैसी सुपर स्पोर्ट्स कारों की तरह है जो सिर्फ अपने पेट्रोल इंजन या सिर्फ इलेक्ट्रिक पावरट्रेन का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, यह अभी तक पता नहीं है कि छात्रों की टीम की इस बाइक में पेट्रोल मोड में चलते समय बैटरी पैक चार्ज होता है या नहीं। यह एक काबिले तारीफ प्रोटोटाइप है और कॉलेज को निश्चित रूप से इसे और विकसित करने के लिए टीम को प्रोत्साहित और उनकी मदद करनी चाहिए।