बांग्लादेश से लगती भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के 976 किलोमीटर लंबे हिस्से में कंटीली तार नहीं लग सकी है। इस वजह से सीमा पर इंसान से लेकर पशुओं और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारत-बांग्लादेश सीमा की रखवाली का जिम्मा संभाले सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' को तस्करी रोकने के लिए कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
नशे की खेप तो रोजाना ही जब्त की जा रही है। इंसानों के अलावा पशुओं की तस्करी के मामले भी सामने आते रहते हैं। पश्चिम बंगाल से लगी बिना बाड़ वाली 578 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा का ज्यादातर हिस्सा नदी नालों से घिरा है, इसलिए यहां पर कंटीली तार नहीं लग सकी है।
हालांकि तार लगाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन वह दुर्गम भूभाग, कम कामकाजी मौसम, भूमि की अधिग्रहण संबंधी समस्याएं, लोगों का विरोध, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश द्वारा आपत्तियां दर्ज कराना और हाल ही में कोविड-19 की स्थिति के कारण बाड़ लगाने का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है।
पांच राज्यों की सीमा से जुड़ा है ये अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर
बाड़ लगाने के कार्य की हो रही है नियमित निगरानी
गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा सदस्य अब्दुल खालेक के जवाब में बताया, सरकार भारत-बांग्लादेश सीमा पर चल रहे बाड़ लगाने के कार्य की प्रगति की नियमित तौर से निगरानी करती है। हमारा मकसद है कि बाड़ लगाने का कार्य समय पर सुनिश्चित हो। दोनों देशों की सीमा पर फ्लोटिंग सीमा चौंकियों, नावों के साथ गश्त, दिन और रात के दौरान नदी के किनारे पैदल गश्त व जब कभी आवश्यकता हो, राज्य पुलिस के साथ विशेष अभियान शुरू कर नदी वाली सीमा पर प्रभुत्व रखा जाता है। छोटे नदी-नालों के गैप सहित बाड़ युक्त सीमा पर तेज रोशनी वाली लाइटें लगाई गई हैं।
अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए सीमा रक्षक बल नियमित गश्त एवं नाके लगाते हैं। निगरानी चौंकियां स्थापित की जाती हैं। सुरंग-रोधी अभ्यास करते हैं। मुख्य रूप से बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के कुछ हिस्सों में कठिन नदी तट क्षेत्र, जो भौतिक बाड़ लगाने के लिए अनुकूल नहीं हैं, होने के कारण कुछ अवैध प्रवासी चोरी छिपे तथा गुप्त रूप से प्रवेश करने में सफल हो जाते हैं।
पांच वर्षों में बीएसएफ द्वारा पकड़े गए अवैध प्रवासी