नए संसद भवन में राज्यसभा की पहली बैठक के दौरान ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई। ऐसा दो बार हुआ। पहली बार जब खरगे ने जीएसटी का जिक्र किया और दूसरी बार तब जब उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति की महिलाओं की साक्षरता दर कम है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों को कमजोर महिलाओं को चुनने की आदत है। दोनों ही बार सीतारमण ने खरगे को तीखे प्रहार किए।
सबसे पहले जानते हैं जीएसटी से जुड़े मामले को
खरगे ने दावा किया कि राज्यों को जीएसटी राशि समय से नहीं मिल रही है। कुछ राज्यों को जीएसटी, मनरेगा, कृषि, सिचाई सहित विभिन्न कार्यक्रमों की अनुदान राशि समय से नहीं मिलती है। क्या इससे ऐसे राज्य कमजोर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन कई राज्यों में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों को उसने गिरा दिया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है। केंद्र सरकार ने उधार लेकर राज्यों को जीएसटी का भुगतान किया है। राज्यों को हर बार एक दो महीने एडवांस में भी जीएसटी का भुगतान किया गया। किसी भी राज्य का कोई भी जीएसटी पैसा केंद्र पर बकाया नहीं है।
महिलाओं के मुद्दे पर भी आए आमने-सामने
खरगे ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिलाओं की साक्षरता दर कम है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों को कमजोर महिलाओं को चुनने की आदत है। वे उन लोगों को नहीं चुनते, जो शिक्षित हैं और लड़ सकती हैं।
इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हम विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं, लेकिन यह व्यापक बयान देना कि सभी पार्टियां उन महिलाओं को चुनती हैं जो प्रभावी नहीं हैं, बिल्कुल अस्वीकार्य है। प्रधानमंत्री जी, हमारी पार्टी ने हम सभी को सशक्त बनाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सशक्त महिला हैं।
धनखड़ ने किया बीच-बचाव
नोंकझोंक के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने दोनों नेताओं को शांत कराया और मामले से जुड़ दस्तावेज पेश करने को कहा। दोनों ने कहा कि वे आज ही अपने दावों के समर्थन में संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखेंगे।
महिला आरक्षण बिल पर किसने क्या कहा?
- महिला आरक्षण बिल पर भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि यह बहुत ऐतिहासिक क्षण है। नई संसद में आज हमारा पहला दिन था। हम बहुत खुश हैं। नारी शक्ति का अभिनंदन... इस बिल पर सर्वसम्मति होती तो अच्छा होता।
- प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि यह तुरंत लागू होगा लेकिन बिल में यह लिखा है कि यह परिसीमन के बाद ही लागू होगा। इसका यह मतलब हुआ कि यह आरक्षण 2029 तक लागू नहीं हो सकता। आपने दरवाजे तो खोल दिए हैं, लेकिन दरवाजों पर महिलाओं के लिए अभी भी 'नो एंट्री' है।
- महिला आरक्षण बिल पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इससे पहले भी जब ऐसा बिल पेश हुआ था तब हमारी पार्टी ने इसका विरोध किया था। इस बिल में सबसे बड़ी कमी ये है कि इसमें OBC और मुसलमान महिलाओं के लिए कोटा नहीं रखा गया इसलिए हम इसके खिलाफ हैं।
- CPM नेता वृंदा करात ने कहा कि यह बिल सुनिश्चित करता है कि अगले परिसीमन अभ्यास तक महिलाएं चुनाव से वंचित रहें। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो 2024 के चुनावों और 18वीं लोकसभा के गठन तक संसद में 1/3 महिलाएं नहीं होंगी, कई विधानसभा चुनावों में 1/3 महिलाएं नहीं होंगी... क्या महिलाओं को मोदी सरकार द्वारा लाए गए इस बिल के लिए आभारी होना चाहिए? मैं कहूंगी कि बिल्कुल भी नहीं।
- महिला आरक्षण बिल पर भाजपा सांसद रमा देवी ने कहा कि आज महिला आरक्षण बिल पेश हुआ और PM मोदी ने इसपर चर्चा की। बहुत समय से महिला आरक्षण बिल की प्रतीक्षा थी, आज यह प्रतीक्षा समाप्त हुई।
- सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सरकार को 9 साल पूरे हो गए हैं। अगर इन्हें महिला आरक्षण बिल लाना था तो ये पहले ला सकते थे। ये इसे आखिरी साल में ला रहे हैं, जब चुनाव हैं। सपा ने हमेशा इसका समर्थन किया है और हम सभी चाहते हैं कि OBC महिलाओं का भी इसमें आरक्षण निर्धारित हो क्योंकि जो आखिरी पंक्ति में खड़ी महिलाएं हैं उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।