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खास खबर: मिस्र के इस खास पत्थर से बरेली का क्या है कनेक्शन? प्रियंका चोपड़ा, लालू यादव से लेकर कोहली की आंखों तक सज चुका है यहां का सुरमा 

सार

बरेली के सुरमा के कारोबार से जुड़े व्यापारी दावा करते हैं कि क्रिकेटर विराट कोहली से लेकर लालू यादव और प्रियंका चोपड़ा समेत कई ऐसी शख्सियतें हैं, जिन्होंने बरेली का सुरमा लगाया है। 
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सांकेतिक फोटो। - फोटो : iStock
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विस्तार
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भले ही मिस्र अपने पिरामिड के लिए दुनिया भर में जाना जाता हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से इसका खास नाता पत्थरों के लिए है। बरेली का सुरमा देश ही नहीं दुनिया भर में मशहूर है। औषधीय गुणों के लिए पहचाने जाने वाला सुरमा भले ही गुलाब हो या फिर ममीरा, इनसब में एक सामग्री कॉमन है और वह है मिस्र से आने वाला विशेष पत्थर। 

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दरअसल, बरेली का सुरमा खास पत्थर को पीसकर बनाया जाता है। सुरमे बनाने वाले खानदानी कारीगर पत्थर आयात कर उसे सुरमे में ढाल रहे हैं। हाल यह है कि बरेली के इस सुरमे की जितनी मांग है उसे पूरा करना बाजार के बस में नहीं है। बरेली के सुरमा के कारोबार से जुड़े व्यापारी दावा करते हैं कि क्रिकेटर विराट कोहली से लेकर लालू यादव और प्रियंका चोपड़ा समेत कई ऐसी शख्सियतें हैं, जिन्होंने बरेली का सुरमा लगाया है। 

इसलिए खास है बरेली का सुरमा
बरेली में छह पीढ़ियों से सुरमे का व्यापार कर रहे शावेज हाशमी का कहना है कि आज देश ही नहीं पूरी दुनिया में बरेली का सुरमा बहुत ही प्रसिद्ध है। ऐसे तो विदेशों में सुरमा केवल श्रृंगार के लिए उपयोग होता है लेकिन बरेली में बनने वाला सुरमा श्रृंगार के साथ साथ औषधि के तौर पर भी इस्तेमाल होता है। वैसे तो देश में सुरमा दिल्ली और मुंबई में भी तैयार किए जाते हैं लेकिन उसमें कई तरह के पाउडर मिलाए जाते हैं। लेकिन बरेली में तैयार होने वाले सुरमे की खास बात यह है कि यह स्टोन बेस होता है। इसे मिस्र से आने वाले एक खास पत्थर को पीसकर तैयार किया जाता है। इस विशेष पत्थर को किसी मशीन से नहीं, बल्कि मजदूर हाथों से घिसते हैं। फिर इसे गुलाब जल में डालते हैं ताकि पत्थर की गर्मी खत्म हो जाए।
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डिमांड ज्यादा है लेकिन सप्लाई है कम
इसके बाद सुरमे को अलग अलग बीमारियों के हिसाब से तैयार किया जाता है। उसी हिसाब से  सुरमे के पाउडर में यूनानी और आयुर्वेदिक औषधि मिलाई जाती है। ताकि लोग इसे औषधि के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकें। औषधि के तौर पर तैयार होने वाले विभिन्न प्रकार के सुरमे में हीरे को छोड़कर सोना, चांदी, तांबा और जाफरान समेत कई प्रकार के जवाहरात भी मिलाए जाते हैं। आज पूरे देश में बरेली के सुरमे की इतनी मांग है कि शहर का पूरा बाजार भी इसे पूरा नहीं कर पा रहा है। एक दिन में बरेली से करीब 25 किलो तक सुरमा देशभर में सप्लाई किया जाता है। बरेली का गुलाम जो बच्चों से लेकर बड़े तक लगाते है वहीं ममीरा सुरमा केवल बड़े लोग ही अपनी आंखों में लगा सकते हैं।

जीएसटी ने सुरमे के उद्योग को भी कर दिया तबाह
हाशमी का कहना है कि एक ग्राम से लेकर 10 ग्राम तक के सुरमे के पैकेट तैयार किए जाते हैं। इसे बनाने में 5 रुपए से लेकर 150 रुपए तक का खर्च आता है। आज बरेली में सुरमा का व्यापार करने वाले, इसे बेचने वाले और कारीगर मिलाकर हजारों लोग इस पेशे से जुड़े हैं। लेकिन इस व्यापार को भी जीएसटी टैक्स ने खत्म कर दिया। इस कारोबार से जुड़े सभी छोटे बड़े व्यापारियों की मांग है कि सरकार इस पर टैक्स खत्म करे ताकि हम अपने पुश्तैनी और परंपरागत उद्योग को बचा सके। उनका कहना है कि आज हमें सुरमे के पत्थर से लेकर उसकी कांच और प्लास्टिक की शीशी तक खरीदने में टैक्स देना पड़ता है। हमारी राज्य सरकार से मांग है कि वो कुछ राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करे, ताकि हम अपना व्यापार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकें।

फिल्मी दुनिया से लेकर क्रिकेटर से नेता तक है कद्रदान
हाशमी बताते हैं कि पहले लोग शौकिया सुरमा लगाते थे लेकिन जब इसके फायदे नजर आने लगे तो इसकी डिमांड बढ़ने लगी। पहले ज्यादातर मुस्लिम ही इसका इस्तेमाल करते थे, मगर अब यह हर मजहब के लोगों की आंखों में ये नजर आता है। आज कई नेता, अफसर और फिल्मी सितारों के अलावा भारतीय क्रिकेटर भी इसे बरेली से मंगवाते हैं। वे सलाह देते हैं कि सुरमा आंखों को दुरुस्त रखने में मदद करता है। आंखों में धूल जाने पर यह सुरमा उसकी सफाई करता है। रात में सोते समय आंखों में सुरमा डालने से आंखें दुरुस्त रहती हैं। इससे आंखें चमकदार भी रहती हैं।

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