तमिलानाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई बेशक अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग पार्टियो के मुख्यमंत्री है, लेकिन उनमें एक समानता है। दोनों राजनीति में नई परंपरा की शुरूआत कर रहे हैं और उन्हें किताबों से बहुत प्रेम है। इसलिए सत्ता संभालते ही दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने मिलने वालों को फूल या गुलदस्ता देने की बजाए किताबें भेंट करने को कहा है। सभी सरकारी कार्यक्रमों में फूल-माला देने पर रोक लगा दी गई है।
मुख्यमंत्री का आदेश क्या हुआ तमिलनाडु और कर्नाटक के सचिवालय में इस पर तेजी से अमल हो रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक अब इन दोनों राज्यों के सचिवालयों में आगंतुकों को मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ अधिकारी से भेंट करने पर फूल या गुलदस्ता लाने से सख्ती से मना किया गया है। इसकी जगह उन्हें किताबें लाने को कहा जाता है।
एम के स्टालिन
स्टालिन किताबों को लेकर बहुत गंभीर नजर आते हैं। अगस्त महीने में उन्होंने लोगों को राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस की बधाई देते हुए अपने संदेश में कहा कि पुस्तकें नई दुनिया की पथ प्रदर्शक हैं। उन्होंने इस आदर्श वाक्य को स्वीकार करने का आह्वान किया-'पढ़ने को जीने के लिए जरूरी बना लीजिए'। स्टालिन ने इस मौके पर मीडिया से बातचीत में कहा "मैंने मिलने वालों से अनुरोध किया है कि वे मुझे शॉल और गुलदस्ते भेंट करने से बचें, और इसके बजाय उपहार में पुस्तकें दें।"
धुर विरोधी जयललिता की तस्वीरें स्कूल बैंग से नहीं हटाईं
तमिलनाडु की राजनीति की एक परंपरा रही है जब भी वहां सरकार बदलती है, तो सत्ताधारी दलों के लिए सार्वजनिक योजनाओं से विपक्षी पार्टियों के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं की तस्वीरें हटा दी जाती हैं। यह एक तरह से बदले की भावना से तो किया ही जाता है, साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री के नाम के प्रचार को रोकने के लिए भी ऐसा होता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने यहां भी एक नया कदम उठाया है।
उन्होंने 65 लाख स्कूल बैग पर अपने धुर विरोधी अन्नाद्रमुक के पूर्व मुख्यमंत्रियों जे जयललिता और एडप्पादी के पलानीवानी की तस्वीरें नहीं हटाने का फैसला किया। बैग सरकारी स्कूल के छात्रों को मुफ्त में बांटने के लिए थे। इस कदम से उन्होंने राजनीति में एक नई परंपरा की शुरूआत की है साथ ही सरकारी खजाने के 13 करोड़ रुपये भी बचा लिए हैं।