फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस संसदीय दल की बैठक: राहुल गांधी बोले- सारी समस्याओं की जड़ एक ही है मोदी सरकार का अहंकार

Wed, 08 Dec 2021 12:04 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज आयोजित होने वाली कांग्रेस संसदीय दल की बैठक को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संबोधित किया। सोनिया ने इस दौरान मृतक किसानों को मुआवजा नहीं देने के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधा।
विज्ञापन
कांग्रेस संसदीय दल की बैठक - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संसद के सेंट्रल हॉल में आज कांग्रेस के संसदीय दल की बैठक जारी है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस बैठक को संबोधित किया। इसमें कांग्रेस पार्टी के सभी लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने हिस्सा लिया है। बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। सोनिया ने कहा कि आइए उन 700 किसानों का सम्मान करें जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी। मोदी सरकार किसानों और आम लोगों के प्रति असंवेदनशील है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से हर परिवार का मासिक बजट बढ़ता जा रहा है। बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने आगे कहा कि हम सीमा मुद्दों पर संसद में पूर्ण चर्चा की मांग करते हैं। वहीं 12 सांसदों के निलंबन पर गांधी ने कहा कि यह अस्वीकार्य है। हम निलंबित सांसदों के साथ खड़े हैं।

विज्ञापन


राहुल गांधी ने भी बोला हमला
राहुल गांधी ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट, चीन के कब्जे सबकी जड़ एक ही है- मोदी सरकार का अहंकार, मित्र-प्रेम व विफलता। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के साथ ही, हम कांग्रेस शासित राज्यों में जनता के मुद्दों को सुलझा रहे हैं- जन के मन की बात सुन रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सीमा के हालात, महंगाई, किसानों के मुद्दे पर चर्चा नहीं चाहती सरकार, सोनिया बोलीं- 12 सांसदों का निलंबन अपमानजनक
संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार सीमाओं के हालात, आम लोगों की कमर तोड़ने वाली महंगाई और किसानों के मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहती। पार्टी इन पर संसद में बहस कराने पर जोर देगी। राज्यसभा से 12 सांसदों के निलंबन को उन्होंने अपमानजनक बताया।

संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई बैठक में दोनों सदनों के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मौजूद रहे। बैठक में सोनिया गांधी ने नगालैंड में 14 निर्दोष लोगों की हत्या पर गहरी संवेदना जताते हुए उनके परिवारों को जल्द से जल्द इंसाफ दिलाने की मांग उठाई।

राज्यसभा से 12 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने को अपमानजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अनपेक्षित था। इससे संविधान और सदन की कार्यवाही चलाने के नियमों दोनों की अवहेलना हुई है। इस मामले को मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में राज्यसभा अध्यक्ष को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने निलंबित सांसदों के साथ एकजुटता दिखाई।

सोनिया गांधी ने कहा कि यह असामान्य है कि संसद को देश के सामने सीमाओं पर मौजूद चुनौती पर चर्चा नहीं करने दी जा रही है। यह चर्चा सामूहिक इच्छा शक्ति दिखाने और मुद्दे को सुलझाने का मौका होगी। सरकार शायद कठिन सवालों के जवाब नहीं देना चाहती, लेकिन यह विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्टीकरण और व्याख्या की मांग करे। उन्होंने सरकार से एक बार फिर सीमाओं के हालात पर पूरी चर्चा कराने की मांग की। 

किसानों के अटल इरादों की सराहना
सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को आखिरकार अपने तीन कृषि कानून वापस लेने ही पड़े, जो उसने पिछले साल बिना किसी चर्चा के अलोकतांत्रिक तरीके से पास किए थे। यह किसानों का अटल इरादा और अनुशासन था, जिसने अहंकारी सरकार को भी झुकने के लिए मजबूर कर दिया।

किसानों की सराहना करते हुए उन्होंने आंदोलन के 12 महीने के दौरान जान गंवाने वाले 700 किसानों को याद करते हुए उनके बलिदान का आदर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम किसान समुदाय को एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने का समर्थन करते हैं। महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है। उन्होंने पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में हालिया कटौती को नाकाफी बताया।

जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है सरकार
सोनिया गांधी ने सेंट्रल विस्टा परियोजना का नाम लिए बिना कहा कि केंद्र सरकार जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है। इन पर जमकर पैसा उड़ाया जा रहा है। उन्होंने बैंकों, बीमा कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, रेलवे, हवाई अड्डों को बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने पहले तो नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण के जरिये अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर लिया। अब वह पिछले 70 साल के दौरान रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक हालात को ध्यान में रखते हुए बनाई गई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को नष्ट करने में लगी है।

केंद्र सरकार के रिकवरी के दावों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह है किसके लिए? कोविड-19 महामारी, उससे पहले नोटबंदी व जीएसटी के संयुक्त प्रभाव के कारण अपनी आजीविका गंवाने वाले लोगों के लिए भला इसका क्या मतलब है? कुछ बड़ी कंपनियों के मुनाफा कमाने और सेंसेक्स के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने का मतलब रिकवरी नहीं है।

इधर, मुनाफा भी श्रमशक्ति को कम करके बनाया गया है तो उसकी क्या सामाजिक कीमत है। उन्होंने कहा कि इस साल के अंत तक पूरी आबादी को कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज देने की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन हम अभी लक्ष्य के आसपास भी नहीं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें