कमाई का अवसर भी
यदि वर्तमान बिजली संकट को छोड़ दें तो देश के ज्यादातर हिस्सों में बिजली की आपूर्ति 18-20 घंटे तक रहती ही है। बड़े महानगरों और मध्यम स्तर के इलाकों तक में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। ऐसी जगहों पर भी इस सौर ऊर्जा प्लांट को लगाया जा सकता है। इससे पॉवर कट होने पर परिवार को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल जाती है तो अतिरिक्त बिजली को बेचकर अच्छा-ख़ासा पैसा भी कमाया जा सकता है।
हाइब्रिड इनवर्टर में एक विशेष तकनीक होती है, जिससे अतिरिक्त बिजली सरकार के पॉवर ग्रिड में वापस चली जाती है और जितनी बिजली वापस जाती है, उपभोक्ता को इसके लिए 6.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान कर दिया जाता है, या उसके बिजली बिल में इसकी कटौती कर दी जाती है। सौर ऊर्जा की सभी लागत को जोड़ देने पर इससे उत्पन्न बिजली की कीमत 2.25 रुपये प्रति यूनिट आती है। इस प्रकार प्रति यूनिट बिजली बेचकर लगभग चार रुपये प्रति यूनिट तक की कमाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि एक परिवार एक महीने में औसतन 1500-2000 रुपये का बिजली बिल चुकाता है। यह अलग-अलग राज्य में बिजली की दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। जबकि एक सौर ऊर्जा प्लांट लगाने में 25-28 हजार रुपये से 56 हजार रुपये तक की लागत आती है। यदि एक परिवार प्रति माह केवल एक हजार रुपये का भी बिजली बिल चुकाता है तो सौर ऊर्जा प्लांट की पूरी लागत चार से पांच साल में निकल जाती है। जबकि इसके बाद इह 15-16 साल तक निर्बाध बिजली आपूर्ति कराता है।
सौर ऊर्जा प्लांट में बार-बार निवेश की कोई आवश्यकता नहीं होती है। तीन से चार साल में एक बार इन्वर्टर की बैटरी बदलनी पड़ती है। इसकी कीमत निकालकर भी बिजली बिल नाम मात्र का ही रह जाता है।
रोजगार का अवसर भी
पूर्व उर्जा सचिव अजय शंकर ने अमर उजाला को बताया कि सौर ऊर्जा रोजगार सृजन के मामले में भी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। कोयले-पेट्रोल जैसे पारंपरिक ऊर्जा संसाधन के क्षेत्र में जहां कर्मचारियों की छंटनी बड़ा मुद्दा बन रही है, वहां सौर ऊर्जा भारी मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराने का कारण बन सकता है।
ऑटोमोबाइल जैसे कुछ सीमित क्षेत्रों में शुरुआती दौर में नौकरियों की कमी पैदा होती है, लेकिन कर्मचारियों को नई तकनीकी में प्रशिक्षण देकर उन्हें ‘रीस्किल’ किया जा सकता है। विश्व में सौर ऊर्जा के अनुभव बताते हैं कि यह पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में ज्यादा रोजगार सृजन कर सकता है। भारत जैसे देश में जहां प्रदूषण के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारियों पर प्रति परिवार को भारी धन खर्च करना पड़ता है, वहां हरित ऊर्जा एक नये उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें जगाती है।