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घर बैठे आमदनी: सोलर प्लांट लगाने के लिए खर्च करने होंगे इतने रुपये, सरकार को भी बेच सकते हैं अतिरिक्त बिजली

सार

सौर ऊर्जा विशेषज्ञ राजीव जेटली ने अमर उजाला को बताया कि दो किलोवाट का इन्वर्टर घर पर 10-12 घंटे का बिजली बैकअप उपलब्ध कराता है। इस क्षमता के सोलर एनर्जी प्लांट को लगाने के लिए आज की तारीख़ में अधिकतम 80 हजार रुपये की लागत आती है। राज्य सरकारें इस पर 30 फीसदी तक की छूट देती हैं...
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सोलर प्लांट - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोयले की कमी ने पूरी दुनिया में बिजली संकट पैदा कर दिया है। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में भी भारी पॉवर कट हो रहा है, तो ग्रामीण इलाकों में 16-18 घंटे तक की बिजली कटौती की जा रही है। इस संकट में भी यदि आप अपने घर पर 24 घंटे बिजली चाहते हैं तो आपको सौर ऊर्जा का विकल्प आजमाना चाहिए। 25 हजार रुपये से 56 हजार रुपये का एक छोटा सौर ऊर्जा प्लांट न केवल आपके घर की बिजली की जरूरत पूरी कर सकता है, बल्कि इससे पैदा अतिरिक्त बिजली (6.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से) बेचकर आप अच्छी-खासी कमाई भी कर सकते हैं। प्रदूषण रहित ग्रीन एनर्जी होने के कारण पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा का विकल्प तेजी से आजमाया जा रहा है। चीन के बाद भारत सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करने के मामले में दूसरे स्थान पर आ गया है।

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सौर ऊर्जा विशेषज्ञ राजीव जेटली ने अमर उजाला को बताया कि दो किलोवाट का इन्वर्टर घर पर 10-12 घंटे का बिजली बैकअप उपलब्ध कराता है। इस क्षमता के सोलर एनर्जी प्लांट को लगाने के लिए आज की तारीख़ में अधिकतम 80 हजार रुपये की लागत आती है। राज्य सरकारें इस पर 30 फीसदी तक की छूट देती हैं। इस प्रकार यह लागत 24 हजार रुपये कम होकर केवल 56 हजार रुपये के लगभग रह जाती है।

देश के ज्यादातर परिवार एकल हैं। परिवार के छोटा होने और बिजली की आवश्यकता कम होने पर केवल एक किलोवाट का प्लांट लगाया जा सकता है। इसकी लागत 25-28 हजार रुपये तक रह जाती है। एक किलोवाट का प्लांट लगाने के लिए लगभग 120 स्क्वायर फीट और दो किलो वाट के प्लांट के लिए 240 स्क्वायर फीट की खुली छत होना इसके लिए अनिवार्य है।
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इस एक प्लांट से माता-पिता और दो बच्चों के एक परिवार के लिए तीन-चार लाइट, दो पंखे और एक टीवी को 10-12 घंटे तक लगातार चलाया जा सकता है। दिन के समय सौर ऊर्जा से बनती हुई बिजली सीधे उपयोग की जाती है। दिन के समय इनवेर्टर में जमा की गई बिजली को रात के समय उपयोग किया जा सकता है। यह पूरी रात के लिए पर्याप्त होता है।

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कमाई का अवसर भी

यदि वर्तमान बिजली संकट को छोड़ दें तो देश के ज्यादातर हिस्सों में बिजली की आपूर्ति 18-20 घंटे तक रहती ही है। बड़े महानगरों और मध्यम स्तर के इलाकों तक में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। ऐसी जगहों पर भी इस सौर ऊर्जा प्लांट को लगाया जा सकता है। इससे पॉवर कट होने पर परिवार को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल जाती है तो अतिरिक्त बिजली को बेचकर अच्छा-ख़ासा पैसा भी कमाया जा सकता है।

हाइब्रिड इनवर्टर में एक विशेष तकनीक होती है, जिससे अतिरिक्त बिजली सरकार के पॉवर ग्रिड में वापस चली जाती है और जितनी बिजली वापस जाती है, उपभोक्ता को इसके लिए 6.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान कर दिया जाता है, या उसके बिजली बिल में इसकी कटौती कर दी जाती है। सौर ऊर्जा की सभी लागत को जोड़ देने पर इससे उत्पन्न बिजली की कीमत 2.25 रुपये प्रति यूनिट आती है। इस प्रकार प्रति यूनिट बिजली बेचकर लगभग चार रुपये प्रति यूनिट तक की कमाई की जा सकती है।  

विशेषज्ञों का आकलन है कि एक परिवार एक महीने में औसतन 1500-2000 रुपये का बिजली बिल चुकाता है। यह अलग-अलग राज्य में बिजली की दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। जबकि एक सौर ऊर्जा प्लांट लगाने में 25-28 हजार रुपये से 56 हजार रुपये तक की लागत आती है। यदि एक परिवार प्रति माह केवल एक हजार रुपये का भी बिजली बिल चुकाता है तो सौर ऊर्जा प्लांट की पूरी लागत चार से पांच साल में निकल जाती है। जबकि इसके बाद इह 15-16 साल तक निर्बाध बिजली आपूर्ति कराता है।

सौर ऊर्जा प्लांट में बार-बार निवेश की कोई आवश्यकता नहीं होती है। तीन से चार साल में एक बार इन्वर्टर की बैटरी बदलनी पड़ती है। इसकी कीमत निकालकर भी बिजली बिल नाम मात्र का ही रह जाता है।

रोजगार का अवसर भी

पूर्व उर्जा सचिव अजय शंकर ने अमर उजाला को बताया कि सौर ऊर्जा रोजगार सृजन के मामले में भी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। कोयले-पेट्रोल जैसे पारंपरिक ऊर्जा संसाधन के क्षेत्र में जहां कर्मचारियों की छंटनी बड़ा मुद्दा बन रही है, वहां सौर ऊर्जा भारी मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराने का कारण बन सकता है।

ऑटोमोबाइल जैसे कुछ सीमित क्षेत्रों में शुरुआती दौर में नौकरियों की कमी पैदा होती है, लेकिन कर्मचारियों को नई तकनीकी में प्रशिक्षण देकर उन्हें ‘रीस्किल’ किया जा सकता है। विश्व में सौर ऊर्जा के अनुभव बताते हैं कि यह पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में ज्यादा रोजगार सृजन कर सकता है। भारत जैसे देश में जहां प्रदूषण के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारियों पर प्रति परिवार को भारी धन खर्च करना पड़ता है, वहां हरित ऊर्जा एक नये उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें जगाती है। 
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