लक्षद्वीप में तो तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति को सांप ने काटा
सांप के काटने और उससे होने वाली मौतों की तस्वीर के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे राज्यों का भी आकलन किया जहां पर सर्पदंश के कोई मामले ही नहीं रिपोर्ट हुए। अगर हुए भी तो उनमें मौतें नहीं हुईं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं 2017, 2018 और 2019 में लक्षद्वीप में सिर्फ एक साल यानी कि 2018 में सिर्फ एक व्यक्ति को सांप ने काटा लेकिन वह जानलेवा नहीं था। कश्मीर इलाके का भी ऐसा ही हाल है। तीन सालों में कश्मीर में 19 लोगों को सांप ने काटा लेकिन कोई मौत नहीं हुई। लक्षदीप और कश्मीर के बाद दमन दीव भी इस मामले में बेहतर है। हालांकि 2017 में दमन दीव में 99 लोगों को सांप ने काटा था। इनमें कोई मौत नहीं हुई, लेकिन उसके बाद इस राज्य में अगले साल सांप के काटने की कोई घटना ही नहीं हुई। और 2019 में तो यह संख्या एक पर जाकर सिमट गई।
नार्थ ईस्ट में सांप काटने की घटनाएं बेहद कम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक असम, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़ दिया जाए तो बाकी नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में सर्पदंश की घटनाएं सामान्य राज्यों की तुलना में बहुत कम हैं। आंकड़ों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में बीते तीन सालों में महज 86 लोगों को ही सांपों ने काटा। जबकि मणिपुर में यह संख्या 279 के करीब रही। मेघालय में जहां 686 लोगों को तीन सालों में सांप ने काटा वहीं नागालैंड में 474 और सिक्किम में 306 लोगों को बीते तीन सालों में सांपों ने काटा।
चंडीगढ़ में है सांपों का बड़ा आतंक
देश के सबसे खूबसूरत शहर चंडीगढ़ में सांपों का बड़ा आतंक है। यहां बीते कुछ सालों में सांपों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। आंकड़े बताते हैं 2017 में जहां रोजाना चंडीगढ़ में चार लोगों को सांप ने काटा और आंकड़ा एक साल में 1294 के करीब पहुंच गया। इनमें से नौ लोगों की मौत भी हो गई। 2018 में 829 लोगों को सांपों ने काटा और 14 लोगों की मौत हो गई। वहीं यह आंकड़ा 2019 में 2239 के पार पहुंच गया और 32 लोग इस वजह से अपनी जान से हाथ गंवा बैठे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं पूरे देश में सांप काटने की घटनाएं 2017 के मुकाबले 2018 और 2019 में बढ़ी हैं। बल्कि मौतें तो 2019 में बीते कुछ सालों की तुलना में सबसे ज्यादा हुई है। आंकड़े बताते हैं 2017 में जहां 1,15,865 लोगों को सांप ने डसा और 1060 लोगों की मौत हुई। वहीं 2018 में यह आंकड़ा 1,65,948 पर पहुंच गया और 887 लोगों की जान चली गई। 2019 में 1,62,724 लोगों को सांप ने डसा, लेकिन मौतें बीते दो सालों की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़कर 3,163 पर पहुंच गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस तरीके के आंकड़े एकत्र करने के बाद पूरे देश में सर्पदंश से होने वाली मौतों और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए योजनाएं बनाई जा सके। हालांकि नेशनल हेल्थ मिशन और राज्य का स्वास्थ्य विभाग लगातार इन मामलों की न सिर्फ मॉनिटरिंग करता है बल्कि लोगों की जान बचाने के लिए एंटी वेनम वैक्सीन और अन्य उपचार के लिए हमेशा आगे आता है।