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स्मार्ट सिटी मिशन से बदल रही देश के शहरों की तस्वीर, जिंदगी होगी आसान

Tue, 11 Oct 2016 05:24 AM IST
संतोष कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : PTI
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केंद्र सरकार देश के शहरों की तस्वीर बदलने को तैयार है। शुरुआत 100 शहरों से की गयी है। स्मार्ट सिटी मिशन से पांच साल में यह शहर स्मार्ट होंगे। मिशन की बड़ी खासियत सहूलियत भरी जिंदगी होगी। सूचना प्रौद्योगिकी के सहारे आम लोगों को आसानी से दैनिक जरूरतें पूरी होंगी। पानी व बिजली की सप्लाई बेहतर होने के साथ साफ-सफाई चकाचक होगी। शहर में आने जाने के लिए परिवहन का अच्छे साधन, तकनीकी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, सुरक्षा जैसी नागरिक सुविधायें वैश्विक मानकों की होंगी।
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दरअसल, केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के अपने महत्वाकांक्षी योजना से शहरों की तस्वीर बदल रही है। खास बात यह कि मिशन में किसी की सिफारिश के आधार पर शहरों का चयन नहीं हो रहा है। इसकी जगह केंद्र सरकार इनके बीच खुली प्रतियोगिता करा रही है। शहरों की अपनी तैयारियों के आधार रैंकिंग होती है। मानक पर खरे उतरने वाले शहरों को मिशन में जगह मिलती है।

मंत्रालय अधिकारियों की मानें तो स्मार्ट सिटी मिशन में 20 शहरों में जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। वहीं, 13 शहर में प्रोजेक्ट शुरू होने को तैयार है। जबकि बीते महीने चुने गये 27 शहरों को स्पेशल परपज वेहिकल (एसपीवी) और इसके कमिश्नर को नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके अलावा पिछले दिनों बाकी 40 शहरों की प्रतियोगिता को शिड्यूल भी जारी हो गया है। अगले साल एक जनवरी से मार्च के बीच इन शहरों को अपने प्रस्ताव केंद्रीय शहरी मंत्रालय में जमा कराने हैं। पांच साल के भीतर सभी 100 शहरों को स्मार्ट बना दिया जायेगा।
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स्मार्ट शहरों में होंगी ये सुविधायें

पानी, बिजली की सप्लाई 24 घंटे होगी। घरों से कचरा इकट्ठा करने की ऑटोमेटिक सुविधा होगी। इसमें इंटेलिजेंट बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम(आईबीएमएस), सीसीटीवी कैमरे और सर्विलांस सिस्टम होंगे। शहरों में प्रवेश के लिये स्मार्ट कार्ड भी जारी हो सकता है। आईबीएमएस के सहारे सभी घरों को लाइटिंग, वेंटीलेशन, और फिल्म की टिकट बुक कराने जैसी सुविधा भी मिलेगी। 

शहरों में सीएनजी युक्त लोफ्लोर बसों के साथ इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। मेट्रो और बीआरटी के साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी की भी सुविधा होगी। सरकारी कामों के लिए ई-गवर्नेंस, सिंगल विंडो सिस्टम, स्मार्ट एजुकेशन की सुविधाएं होंगी।

स्मार्ट शहरों को केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि स्थानीय निकाय एक सलाहकारी संस्था का गठन करें। इसमें सांसद, विधायक, स्थानीय निकाय प्रमुख, जिलाधीश, एपीवी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, स्थानीय युवाओं के अलावा आरडब्ल्यूए, करदाता संघ, स्लम बोर्ड और महिला संघ का अध्यक्ष सदस्य के तौर पर शामिल होंगे। शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं के निर्माण में संस्था की सलाह ली जायेगी। इसके आधार पर आगे की रणनीति बनेगी।
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एक साल में दिखने लगेगा असर

अभी तक मिशन में चयनित शहरों की संख्या 60 है। जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की शुरुआत पहले फेज के 20 शहरों में हो गयी है। इनकी घोषणा बीते जनवरी में हुयी थी। इनमें 82 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। वहीं, जल्द ही 113  दूसरे प्रोजेक्ट भी शुरू हो जायेंगे। इन शहरों में एक साल में मिशन का असर दिखने लगेगा। दूसरी तरफ फास्ट ट्रैक कंपटीशन केआधार पर मई में चयनित 13 शहर स्पेशल परपज वेहिकल (एसीपीवी) बनाकर स्थानीय स्तर पर प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं। मिशन की मानकों पर खरा उतरते ही इसे बजटीय मंजूरी मिल जायेगी। इसके अलावा पिछले महीने चयनित 27 शहरों को एसपीवी के साथ इसके कमिश्नर की नियुक्ति का आदेश पिछले दिनों जारी कर दिया गया है।

मिशन में शामिल 60 शहरों को स्मार्ट बनाने के लिये सरकार 1,44,742 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। पांच साल में केंद्र सरकार हर शहर को 500 करोड़ रुपये देगी। वहीं, इतनी ही राशि राज्यों से मिलेगी। इसके अलावा स्थानीय शहरी निकाय अपने स्तर पर राजस्व के स्रोतों को दोहन कर सकते हैं। बाकी संसाधन ऋण, बांड व पीपीपी मॉडल से जुटायी जायेगी। इस काम में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थायें मददगार होंगी।

विशेषज्ञों की मानें तो करीब सात साल पहले 2009 में कई देशों ने अपने यहां स्मार्ट सिटी मिशन पर काम शुरू किया। दक्षिण कोरिया, यूएई और चीन ने इस प्रोजेक्ट पर निवेश किया। फिलहाल वियना, एम्सटर्डम, लियोन, वेरोन और सिओल के पास सोंगदो स्मार्ट सिटी के श्रेणी में आते हैं।
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