भारत, श्रीलंका, अमेरिका सहित कई देशों में खेतिहर मजदूरों की किडनी में आ रही खराबी पर वैज्ञानिकों ने एक नया दावा किया है कि इसकी वजह गन्ने और धान की फसल जलाना हो सकता है। इन्हें जलाने पर बेहद सूक्ष्म (नैनो) सिलिका तत्व वातावरण में फैल जाते हैं, जो सांस या पानी के जरिये मजदूरों व इन खेतों के निकट रहने वालों के शरीर में दाखिल होकर उनकी किडनी में जमा हो रहे हैं। यही उनकी किडनी को खराब भी कर रहे हैं।
यह अध्ययन करने वाले अमेरिका के कोलोराडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रो. जेरेड ब्राउन ने दावा किया कि अब तक इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया, न विस्तृत अध्ययन हुए, लेकिन उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि गन्ने को जलाने पर इसकी राख से निकलने वाला सिलिका यहां काम करने वाले खेतिहर मजदूरों की किडनी कोशिकाओं में बड़ी मात्रा में मिल रहा है। यह सिलिका उन्हें दूसरे किडनी रोगियों में बहुत कम मात्रा में मिला।
इसी आधार पर उन्होंने दावा कि खेतिहर मजदूरों में किडनी रोग की यह बड़ी वजह हो सकता है। इसे अब तक रहस्य माना जा रहा था कि कई गन्ना खेतिहर मजदूरों की किडनी में खराबी क्यों आ रही है।
इसे जलवायु परिवर्तन की वजह से उपजी नई बीमारी माना जा रहा था। धान की फसलों पर काम कर रहे मजदूरों में भी यह किडनी खराब होने की अहम वजह हो सकता है। इनमें भी फसल लेने के बाद इसके अवशेष खेत जलाए जाते हैं। एजेंसी
आसपास के लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत
अध्ययन में शामिल रिसर्च जॉनसन ने दावा किया कि भले ही गन्ने या धान को जलाने से जलवायु परिवर्तन पर क्या असर हो रहा है, हमें पुख्ता तौर पर नहीं पता, लेकिन खेतिहर मजदूरों की किडनी पर इसका बुरा असर हो रहा है, यह हम आज कह सकते हैं। इससे बचने के लिए इन खेतों में काम रहे मजदूरों और आसपास रहने वालों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।