लखीमपुर में किसानों की हत्या के बाद अपनी ही सरकार पर हमला बोल रहे वरुण गांधी के समर्थन में शिवसेना उतर आई है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखा है कि किसानों की हत्या, खून का सैलाब देख इंदिरा गांधी के पोते और संजय गांधी के बेटे वरुण गांधी का तो खून खौल उठा है, लेकिन और सांसदों के खून में क्या बर्फ का पानी बह रहा है? अगर उन सांसदों का खून ठंडा पड़ गया होगा तो देश को जगाने के लिए नया आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा।
संवेदना भी व्यक्त न कर सके पीएम और गृहमंत्री
सामना के लेख में लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह और देश के कृषि मंत्री इस पर अभी तक संवेदना भी व्यक्त नहीं कर सके हैं। कृषि मंत्री को तो तत्काल लखीमपुर खीरी पहुंचना चाहिए था। वे गए ही नहीं, बल्कि वहां जानेवालों को रोके रखा। भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी एकमात्र अपवाद हैं, जिन्होंन घटना का विरोध किया। ऐसा करने पर वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकालकर सजा दी गई।
किसानों के लिए आज महाराष्ट्र बंद है
सामना ने अपने लेख में महाराष्ट्र बंद का भी जिक्र किया। उसमें लिखा गया कि वरुण गांधी ने किसानों को कुचलकर मारनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसमें उन्होंने गलत क्या किया? और ऐसे कितने लोग होंगे जिनका मन इस घटना पर व्यथित होगा। ऐसे ही लोगों के लिए आज महाराष्ट्र बंद है। किसानों के समर्थन में महाराष्ट्र दृढ़तापूर्वक खड़ा है।