शीतल अंगुराल के साथ-साथ पार्टी ने पश्चिम बंगाल के रायगंज से मानस कुमार घोष, राणा घाट दक्षिण से मनोज कुमार विश्वास, बगदा से बिनय कुमार विश्वास और मानिकताला से कल्याण चौबे भट्टाचार्य को मैदान में उतारने की घोषणा की है।
हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा पंजाब में कोई लोकसभा सीट हासिल करने में नाकाम रही, लेकिन उसके वोट शेयर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पार्टी इस बढ़त को बनाए रखना चाहती है। इसके लिए वह एक बार फिर उन्हीं कांग्रेस-आप नेताओं को आगे बढ़ाने का काम कर रही है, जिनके सहारे उसने पंजाब में अपनी दखल बढ़ाई है। शीतल अंगुराल को दुबारा मैदान से उतारना यही बताता है।
नाटकीय रहा शीतल अंगुराल का सफर
शीतल अंगुराल पहले भाजपा के ही नेता थे, लेकिन आम आदमी पार्टी के पंजाब में मजबूत होने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था। आम आदमी पार्टी ने शीतल अंगुराल को जालंधर पश्चिम की सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा था और उन्होंने जीत हासिल की थी। लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले उन्होंने एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया और पंजाब में भाजपा को मजबूत करने में जुट गए।
बीजेपी के तरुण चुघ के बेहद करीबी माने जाने वाले शीतल अंगुराल ने चुनाव के पहले अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन स्पीकर ने स्वीकार नहीं किया था। बाद में अंगुराल ने अपना इस्तीफा वापस लेने की कोशिश की, लेकिन शीतल को झटका देते हुए स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें चुनाव में जाने के लिए मजबूर कर दिया। इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री भगवंत मान और शीतल अंगुराल दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी।
पश्चिम बंगाल में वापसी
तमाम दावों के बाद भी भाजपा लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। उसने आगे बढ़त बनाने की बजाय अपना पुरानी बढ़त भी खो दिया। ऐसे में उपचुनावों में यदि पार्टी वापसी करती है, तो यह उसके लिए एक बूस्टर डोज का काम करेगी। लेकिन भाजपा ने अभी से ममता बनर्जी के शासन में साफ-पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव होने पर प्रश्न खड़े करने शुरू कर दिये हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा कार्यकर्ता अभी भी शरणार्थी कैंपों में टिके हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि वे वापस जाते हैं, तो तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उन पर जानलेवा हमला कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल की रक्तरंजित राजनीति को देखते हुए इस आशंका को सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता। इस माहौल में होने जा रहे उपचुनाव में पार्टी कितनी सफलता हासिल कर पाएगी, कहना कठिन है।