राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने सरकार पर पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सेंट्रल विस्टा परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। जबकि अब उसके पास राज्यों को जीएसटी राजस्व के अपने हिस्से का भुगतान करने के लिए भी रुपये नहीं बचे हैं। इस दौरान उन्होंने सरकार से कहा कि अमीर और ज्यादा टैक्स चुकाने वाले लोगों पर कर की सीमा को बढ़ाया जाए और गरीब जनता, जो इस कोरोना महामारी में समस्याएं झेल रही है, उसे टैक्स से राहत दी जाए।
उन्होंने सरकार से और अधिक अमीर लोगों को कर के दायरे में लाने के लिए कहा,।उन्होंने कहा कि अगर सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए कर लगाना है, तो अमीर और ज्यादा टैक्स चुकाने वाले लोगों पर अधिक कर लगाया जाना चाहिए लेकिन गरीबों को बख्शा जाना चाहिए। गोहिल ने कहा कि मध्यम वर्ग और गरीबों को कोरोना महामारी से बहुत नुकसान हुआ है जिससे उनका बजट गड़बड़ा गया है।
गोहिल कहा कि वित्त मंत्री ने दावा किया है कि सिर्फ गैर-भाजपा शासित राज्यों को ही नहीं बल्कि सभी राज्यों को जीएसटी संग्रह में उनका हिस्सा नहीं दिया गया है। सेंट्रल विस्टा परियोजना को लेकर हमला करते हुए गोहिल ने कहा कि अगर सरकार के पास राज्यों के जीएसटी हिस्से का भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं, तो उसे नई संसद पर पैसा खर्च करने का भी कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार महामारी के कारण रुपये नहीं होने के कारण वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों और विकलांगों को दी जाने वाली रेलवे रियायतों को रोक सकती है तो क्या करोड़ों रुपये की सेंट्रल विस्टा परियोजना को नहीं रोका जा सकता है।
इस दौरान गोहिल ने कैग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपनी सेवाओं के लिए स्रोत पर कर नहीं काटा, जिसके परिणामस्वरूप राजकोष को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा उन्होंने वित्त मंत्री से रक्षा बलों को दिए जाने वाले कपड़ों, उपकरणों और राशन और आवास की आपूर्ति में अनियमितता को भी रोकने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि कैग की एक रिपोर्ट में सुरक्षा बलों को दिए जाने वाले स्लीपिंग बैग और जूतों में अनियमितता पाई गई है।
इस दौरान गोहिल ने गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार के कारण किसानों की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अपनी सभी कृषि योग्य भूमि को खोने की संभावना का सामना कर रहे हैं।
इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा सदस्य शिव प्रताप शुक्ला ने उनके आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वहां के किसानों को उनकी जमीन के मौजूदा मूल्य से चार से छह गुना अधिक मुआवजा दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों और मीडिया सहित सभी ने बजट की सराहना की है।